Voltmeter (वोल्टमीटर क्या है ) ? Types | working | Applications | Hindi me

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दोस्तों आप सभी ने ammeter पर article तो पढ़ा ही होगा. अगर नहीं पढ़ा है तो अभी हमारे साईट पर ammeter के blog पढ़ लीजिये. आज हम एक और instrument के बारे में पढेंगे और वो है voltmeter. Voltmeter भी हमारे lab में बहुत आम instrument है. तो चलिए शुरू करते है और voltmeter के बारे में थोडा ज्ञान प्राप्त करते है.

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voltemeter
Voltmeter

वोल्टमीटर क्या होता है?

Voltmeter को हम voltage meter भी कहते हैं. ये एक instrument है जो electronic या electrical circuit में किसी दो point के बीच में potential difference या voltage measure करने के लिए उपयोग करते हैं. कुछ voltmeters सिर्फ direct current (DC) circuits में इस्तेमाल होते हैं और कुछ alternating current(AC) circuit में भी उपयोग होते हैं. यही नहीं कुछ specialized voltmeters भी होते हैं जो radio frequency (RF) voltage को measure करते हैं.

Voltmeter का इंटरनल resistance

एक basic analog voltmeter में sensitive galvanometer (current meter) present होता है. Voltmeter का internal resistance बहुत high होता है. नहीं तो ये significant amount of current draw कर लेगा और इसलिए वो test के वक़्त operation को disturb कर सकता है. यही कारण है कि Voltmeter का internal resistance बहुत high होता है. Galvanometer की sensitivity और series resistance ही voltage की range determine करता है .

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Voltmeter kya hai ?

 

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Different रेंज ऑफ़ voltmeter

Digital voltmeter voltage को directly numerals में दिखाता है. Practical laboratory voltmeters की maximum range 1000 से 3000 volts(V) तक का होता है. ज़्यादातर commercially manufactured voltmeters के several scales होते हैं जो 10 के power में increase होता है. जैसे- 0-1V, 0-10V, 0-100V और 0-1000 V.

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Oscilloscope : low voltages measurement 

Oscilloscope का उपयोग low voltages को measure करने के लिए होता है. उसमे vertical displacement instantaneous voltage को दिखाता है. Oscilloscope AC और RF application में peak से peak voltage measure करने के लिए भी बहुत अच्छा है. High potential को measure करने के लिए heavy-duty probes, wiring और insulator की ज़रुरत होती है.

Voltmeter, types and working
oscillscope and voltemeter

Voltmeter categories:

आज के commercial या laboratory standard voltmeter में electromechanical mechanism का उपयोग होता है. इसमें current wire के turns के द्वारा flow होता है जो voltage की reading में translate होता है. इसके अलावा हमारे पास दुसरे type के भी voltmeter होते हैं जैसे electrostatic voltmeter जो electrostatic forces का उपयोग करता है. इसलिए ये ऐसा voltmeter है जो voltage को current के effect की वजाय directly measure करता है . Potentiometer voltage को known voltage के साथ compare कर measure करता है. ये भी low voltage को measure करने के लिए उपयोग होता है.

Computer practice में, standard lab voltmeters adequate होता है क्युकि voltage जो आता है वो moderate होता है ज्यादातर 1V से 15V तक होता है. Cathode-ray-tube(CRT) monitors कुछ hundred volts पर operate करती है. Electronic voltmeter को आज के युग में vacuum-tube voltmeter से replace किया जाता है. ये voltmeter amplification या rectification या दोनों process का इस्तेमाल कर या तो alternating या direct current voltages को measure करता है. Current जो meter movement को actuate करने के लिए ज़रुरत होती है वो circuit जिसका measurement हो रहा है उससे नहीं लिया जाता है. इसलिए इस type के instrument में circuit loading के errors नहीं होते.

Voltmeter का working principle:

Voltmeter का main principle यह है की वो parallel में connected होना चाहिए जिसके across भी voltage measure करना चाहिए. Parallel connection इसलिए भी उपयोग होता है क्युकि voltmeter को इस तरह से बनाया गया है की उसकी resistance की value बहुत high होती है.इसलिए अगर इतना high resistance series में connected हुआ तो current almost zero होता है.

अगर ये parallel में connected होते है तो load impedance भी voltmeter के high resistance के साथ parallel हो जाता है. और इसलिए ये combination भी वही impedance देता है जो load के पास होता है. और इसलिए हम ये जानते है की parallel circuit में voltage load और voltmeter के बीच same ही होता है और इसलिए voltmeter voltage measure कर लेता है. एक ideal voltmeter में resistance infinity होता है और इसलिए current drawn भी zero होता है और instrument में power loss नहीं होता. पर practically हम ये नहीं कर सकते.

दोस्तों हम अब voltmeter के types के बारे में पढेंगे.

Voltmeter के classification:

Construction principle के according हमारे पास different type के voltmeters उपलब्ध है और mainly ये है:

  1. Permanent Magnet Moving coil (PMMC) Voltmeter.
  2. Moving Iron (MI) Voltmeter.
  3. Electro Dynamometer Type
  4. Rectifier Type Voltmeter
  5. Induction Type
  6. Electrostatic Type
  7. Digital Voltmeter (DVM).

Measurement के basis पर voltmeter के types:

  1. DC voltmeter
  2. AC voltmeter

DC voltmeter के लिए PMMC instrument का इस्तेमाल होता है. MI ( मूविंग आयरन ) instrument AC और DC voltages दोनों को measure करने में उपयोग होता है, electrodynamometer type, thermal instrument भी दोनों AC और DC voltages measure कर सकते हैं.

PMMC voltmeter:

जब current carrying conductor magnetic field में रखा होता है तो conductor पर mechanical force act करता है. अगर वो moving system के साथ attach हो तो coil movement के साथ pointer भी scale पर move करता है. PMMC instrument में permanent magnet होते हैं. ये DC measurement के लिए perfect हैं क्युकि यहाँ deflection voltage के proportional होते हैं.और ये इसलिए होता है क्युकि meter के material का resistance constant होता है इसलिए जब भी voltage polarity reverse होती है तो pointer की deflection भी reverse होती है. इसलिए ये सिर्फ DC measurement के लिए उपयोग होता है.

Voltmeter, types and working
Voltmeter, types and working
  • इसका advantage ये है की इसके पास linear scale , power consumption low और accuracy high होती है.
  • इसका disadvantage ये है की ये सिर्फ DC quantity measure करता है और इसका cost high होता है.

जहाँ B flux density, l=coil की length, b=coil की breadth, N=coil की no. of turns,i=current.

MI voltmeter:

MI instrument का मतलब moving iron instrument होता है. यह AC और DC measurments दोनों के लिए इस्तेमाल होता है क्युकि deflection Ɵ voltage के square से proportional होता है. और ये हम assume करते हैं की meter का impedance constant होता है, तो अगर voltage की कोई भी polarity हो meter directional deflection दिखाता है. इस voltmeter का और भी classification है:

  1. Attraction type
  2. Replusion type

जहाँ I current है, L coil की self inductance है, θ deflecting torque है.

Electrodynamometer Type Voltmeter

Electrodyanometer instrument इसलिए इस्तेमाल किया जाता है क्युकि उसकी calibration AC और DC दोनों के लिए same है. मतलब ये हुआ अगर हूँ DC के साथ callibration कर रहे हैं तो AC भी बिना callibration के measure किया जा सकता है.

Principle:

इसमें दो coil होते हैं, एक fixed और दूसरा movable. अगर voltage दोनों coil पर apply किया जाता है तो दोनों coil में current flow होता है और scale पर pointer zero position पर होता है. क्युकि दोनों किल्स equal और opposite torque develop होता है.अगर किसी एक torque का direction reverse होता है तो coil में current भी reverse होता है, जिससे unidirectional torque produce होता है. Voltmeter के लिए , connection parallel होता है, दोनों coils series में होते हैं जिनमे non-inductive resistance होता है.

  जहाँ I circuit में flow हो रहा current है, M mutual inductance है.

इसमें कोई hysteresis error नहीं होता है. इसका disadvantage यह है की torque/weight ratiolow होती है, friction loss high है, बाकी instrument से expensive है.

Electrostatic instruments:

जब charged particles से बनाया हुआ electric field conductor पर act होता है जो पहले से ही current से charged हो रहा है तो एक deflecting torque produce होता है. और ये इस process से किया जाता है-

  1. दो electrode जो oppositely charged है जिसमे एक electrode fixed है और दूसरा movable है.
  2. दो electrode जिसके बीच का ये force जिसके कारण moving electrode का rotary motion होता है.

जहाँ V voltage है, C capacitance है,  θ deflection है. Electrostatic meter का advantage है की इसका power consumption low है, AC और DC quantities दोनों के लिए इस्तेमाल होता है, hysteresis loss नहीं है, stray magnetic field error नहीं है. इसका disadvantage यह है की इसका scale non-uniform है, operating force low है. इसका size भी बड़ा होता है और इसका construction भी आसान नहीं है.

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Rectifier Voltmeter

यह AC या DC measurement दोनों के लिए इस्तेमाल होता है. DC measurement के लिए हमे PMMC meter connect करना होता है जो pulsating DC voltage measure करता है जो एक recrified voltage है जो bridge rectifier के across connected है.

Rectified voltmeter का advantage :

  1. High frequency के लिए उपयोग होता है.
  2. इसका अधिकतर range के लिए uniform scale है.

इसका disadvantage है की AC operation में sensitivity में temperature decrease होने के कारण error produce होता है.

Digital voltmeter:

इसके बारे में हमने उपर पढ़ लिया है दोस्तों इसलिए इसे वापस repeat नहीं करेंगे.

उम्मीद है आप सभी को ये article पसंद आया होगा और voltmeter के बारे में अब आप के काफी जानकारी हो गयी है.


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