Voltage Regulators (वोल्टेज रेगुलेटर) क्या है? | Use|Working |


दोस्तों स्वागत है आप सभी का मेरे इस electronic column में और आज हम एक ऐसे component के बारे में बात करेंगे जो हम सभी के घर पर present होता है, जी हाँ हम voltage regulator की बात कर रहे है.

Voltage Regulator

चाहे हमारी कार हो या laptop या smartphone प्रत्येक electronic device को fluctuating voltage से कुछ ना कुछ protection चाहिए. आज जब technology इतना advance हो चुकी है devices pack और tight होते जा रहे हैं. इतना key sensitive component जैसे microprocessor और ICs सब एक ही chip में होते हैं. अगर इसमें थोड़ा सा भी voltage change होता है तो इस पूरे design को affect करता है. तो आख़िरकार इस sensitive component को कैसे protect करें? इसलिए हमे regulator चाहिए जो voltage को stable रखता हो और उसे input से output तक smooth रखता है.

Voltage Regulators पर एक नज़र :

Electronic components की इस दुनिया में, voltage regulator को सबसे ज्यादा use किया जाता है लेकिन ये IC करती क्या है? ये circuit हमे  किसी भी value के input voltage के लिए एक predictable और fixed output voltage provide करती है .

तो आख़िरकार voltage regulator इस task को कैसे achieve करता है? कुछ voltages को हम एक साधारण से zener diode से भी control कर सकते हैं जबकि कुछ application को linear या switching regulators की advanced topology की भी ज़रुरत होती है. प्रत्येक voltage regulator का एक primary goal और secondary goal होता है:

Primary: किसी भी circuit में input voltage conditions के variation के response में  एक steady output generate करना, ये इसका primary goal है. अगर आपका supply 9V देता है लेकिन अगर आपको सिर्फ 5V चाहिए तो आप उसे voltage regulator की मदद से उसे step down करेंगे.

Secondary: Voltage regulators आपके electronic circuit को किसी भी potential damage से shield और protect करता है.


हम जब भी voltage regulator को अपने circuit में add करना चाहते हैं तो हमारे पास ये mainly दो types होते हैं:

1. Linear voltage regulators

2. Switching voltage regulators

लेकिन इसके अलावा भी इसके अलग अलग types होते हैं. तो  अब हम उसके types के बारे में पढेंगे.

Linear voltage regulator के दो types होते हैं: Series और Shunt और Switching voltage regulator के तीन प्रकार होते हैं: Step up, Step down और Inverter voltage regulators.

Linear Voltage Regulators:

इस type के  regulator , circuit में voltage divider के जैसे act करते हैं और इस kind के regulator low power या low – cost application को design करते वक़्त हम इस्तेमाल करते हैं. Linear regulator के साथ हम power transistor (BJT या MOSFET) के advantage ले सकते हैं जो variable resistor का role play करता है, input supply के changes के according output voltage को raise या lower करने का काम करता है.

हमारे circuit में किसी भी प्रकार का load हो तो एक linear voltage regulator हमेशा constant steady output ही provide करता है. Example के लिए एक 3-pin linear voltage regulator  जैसे LM7805 जो consistent 5 volt, 1 ampere output देता है जब तक input voltage 36 volts से exceed कर जाता है. LM7805 series में wired है ताकि वो stable output दे सके.

Linear Voltage Regulators
Linear Voltage Regulators

Linear voltage regulator के advantages:

  • Low output ripple voltage देता है.
  • Load या line changes के लिए fast response time.
  • Electromagnetic interference और noise भी कम होता है.

Linear voltage regulator के disadvantage:

  • Efficiency बहुत कम होती है.
  • Large space की ज़रुरत होती है – heat sink की ज़रुरत है.
  • Input के above voltage increase नहीं होता है.

जैसा की ये resistor की तरह behave करता है जो voltage stabilize करता है और ये tons of energy waste करता है और ये resisted current को heat में बदल देता है. इसलिए ये voltage regulator वहां use होता  है, जहाँ power की requirements कम होती है.

Series Voltage Regulator :

Series voltage regulator में variable element का इस्तेमाल होता है, जो load के series में रखा जाता है.  उस series element के resistance को change करने पर उसके across voltage को हम change कर सकते है. और load के पास जो voltage होगा वो हमेशा constant होगा.

Series Voltage Regulator
Series Voltage Regulator

जो भी current draw होता है, load उसे effectively इस्तेमाल करता है, और यही series voltage regulator का सबसे बड़ा advantage है. यहाँ तक की जब load को current की कोई ज़रुरत नहीं होती तो series voltage regulator कोई भी current draw नहीं करता. इसलिए, series regulator shunt voltage regulator से ज्यादा efficient होता है.

2018-12-19_22h33_37एक simple series voltage regulator circuit है.

ये conventional regulator के पास Zener diode controlled transistor है, जो load के साथ series में है. यहाँ regulator में variable element transistor है. variable input voltage के basis पर ramping resistance up या down होता है ताकि steady और consistent output voltage मिले.

Shunt Voltage Regulator

Supply voltage को variable resistance के through ground का path create करके shunt voltage regulator अपना काम करता है. Shunt regulator के through current को load से divert करके ground में uselessly flow करा दिया जाता है. और इसलिए वो series regulator से कम efficient है. लेकिन ये बहुत simple होता है जिसमे सिर्फ voltage-reference diode होता है और ये बहुत ही कम powered circuits में इस्तेमाल होता है जहाँ current का waste बहुत छोटी सी बात है. ये form voltage reference circuits के common है. एक shunt regulator सिर्फ current को sink(absorb) कर सकता है

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Shunt regulators के application:

  • Low Output Voltage Switching Power Supplies
  • Current source और sink circuits
  • Error amplifiers
  • Adjustable Voltage या Current Linear and Switching power supplies
  • Voltage Monitoring
  • Analog और digital circuits जिसे precision reference चाहिए
shunt voltage regulator
shunt voltage regulator

ये shunt voltage regulator series में wired नहीं है बल्कि excess current को ground में भेज देता है.

Advantages:

  • Electromagnetic interference कम होता है और switching regulator से noise भी कम होता है.
  • Line या load voltage के changes को ये quick response time देता है.
  • Steady और consistent low output voltage देता है जो low power applications के लिए ideal है.

Disadvantages:

  • ये energy efficient बिलकुल भी नही होता है अगर input और output voltage का difference high होता है.
  • हमेशा ही इसे heatsink की ज़रुरत पड़ती रहती है ताकि ये अपनी wasted energy को dissipate कर सके.
  • हमे कभी भी output voltage input voltage से high नहीं मिल सकता है.

Switching Voltage Regulators:

जब हमारा input और output voltage के बीच में बहुत ज्यादा difference होता है तब switching regulators का इस्तेमाल करना ही perfect होता है. Linear voltage regulators के compare में switching regulators का power conversion efficiency ज्यादा होता है. लेकिन ये efficiency की quality add होने के कारण circuit को और complex बना देता है.

जब आप switching regulator को देखेंगे तो उसकी internal circuitry बिलकुल अलग दिखेगी, यह controlled switch का इस्तेमाल कर voltage regulate करता है. इसलिए यह switching regulator कहलाता है.

तो अब देखते है switching regulator कैसे काम करता है? Input voltage को constantly resist करना और उसे ground को जो sink की तरह इस्तेमाल कर उसे send कर देने के वजाय, switching regulators  उसे store करता है. फिर charges को smaller pieces में output voltage को feedback के basis पर deliver कर देता है. Output voltage को switch में feedback करके regulator constant check-in रखता है की output में voltage chunks की timing को increase या decrease करना है या नहीं.

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Switching regulators थोड़े ज्य्यादा complex है.

Switching regulator ने अपना charge level transistor की मदद से maintain कर रखा है. और ये transistor तभी turn on होता है जब storage को और ज्यादा energy की ज़रुरत होती है  और ये turn off हो जाता है जब desired output voltage circuit को achieve हो जाता है. यह एक बहुत अच्छा energy efficient method है जो output voltage को manage करता है. यह ना सिर्फ input voltage के flow resist करता है बल्कि voltage के change को भी react करता है और ज़रुरत के हिसाब से switch on/off भी करता है.

लेकिन ये switching process के disadvantages भी है. जितनी जल्दी ये switching regulator switch करता है उतना ही time conductive से nonconductive स्टेट में आने में लगता है जिसके कारण conversion efficiency में reduction होता है. Circuit में noise भी बहुत generate होता है.

लेकिन switching voltage regulator के बहुत सारे applications है. यह regulators ना सिर्फ step down या voltage को boost up करता है बल्कि उसे invert भी करता है.

दोस्तों जैसा की हम जानते है की switching voltage regulator, output को alter करने के लिए regulator को बहुत rapidly on और off करता है. ये काम करने के लिए regulator को control oscillator की ज़रुरत होती है और storage components को charge भी करता है.

Switching regulator में frequency vary होती है अगर वो pulse rate modulation के साथ है, PRM के कारण जो constant duty cycle और noise spectrum होता है वो भी vary होता है.उस noise को filter करना बहुत difficult है.

Switching regulator के साथ pulse width modulation, constant frequency, varying duty cycle, ये efficient है और इसमें noise को filter करना भी आसान है. Switching regulator में, inductor के through continuous mode current कभी भी zero drop नहीं होता है. यह highest output power देता है. इसका performance बाकी regulator से बेहतर है. Switching regulator में, inductor के through जो discontinuous mode current वो zero drop हो जाता है. जब current low होता है तब यह better performance देता है.


Switching Topologies:

Switching regulator के पास दो तरह के topologies होते है: Dielectric isolation और Non-isolation

Non-isolation : यह Vout/Vin में small changesपर based है. Example:  Step Up voltage regulator (Boost) – Raises input voltage; Step Down (Buck) – lowers input voltage; Step up/Step Down (boost/buck) Voltage regulator- input voltage को low या raise या invert करता है और यह controller पर depend करता है; Charge pump-यह inductor का इस्तेमाल  बहुत सारे input provide करता है.

Dieltectric-isolation : यह radiation और intense environment पर based है.

Switching topologies के advantages:

Switching power supply का सबसे बड़ा advantage efficiency, size और weight है. यह भी complex design है, जो higher power efficiency को handle करने में capable है. Switching voltage regulator output voltage input voltage से ज्यादा या कम या invert कर देता है.

Switching topologies के disadvantages:

  • Higher output ripple voltage
  • Slower transient recovery time
  • EMI output में बहुत noise produce करता है.
  • Very expensive


Staying Simple – Zener Diode:

बहुत सारे designers linear और switching voltage regulator के complexity को deal करने की ज़रुरत नहीं पड़ती है. ऐसे situations में हम बहुत ही simple solution पर भरोसा कर सकते है और वो solution है zener diode की मदद से voltage regulate करना. यह एक अकेला component  बहुत सारे casesमें जहाँ हमे voltage regulate करने की  की ज़रुरत होती है वहां यह काम कर देता है और इसे किसी special parts की ज़रुरत भी नहीं होती है.

Zener diode सभी excess voltage  उसके threshold voltage के उपर रख और उसे ground के साथ shunt कर अपना काम करता है. लेकिन ये  सभी simplicity हमेशा limited abilities के साथ आते है. देखा जाए तो zener diode को voltage regulators की तरह सिर्फ वही circuit में इस्तेमाल किया जाता है जहाँ low power applications की सिर्फ ज़रुरत होती है.


आपको कौन सा regulator की ज़रुरत है?

सभी design unique होते हैं, और ऐसा कोई universal regulator नहीं है जो किसी भी engineer की सभी ज़रुरत को पूरा करे. इसलिए आपको अपने नए project को case- by-case समझना होगा और नीचे दिए हुए सवाल को पूछना होगा.

  • क्या आपके design की ज़रुरत low output noise और low electromagnetic interference है? अगर है तो आप linear regulators है.
  • क्या आपके design की ज़रुरत input का fastest response और output disturbances है? तो भी आप linear regulator को ही choose करे.
  • क्या आपका design high power पर operate हो सकता है? इस situation में switching regulators ही सस्ता पड़ेगा क्युकि उसे कोई भी heatsink की ज़रुरत नहीं है.
  • क्या आपका circuit सिर्फ DC power supply पर ही operate करता है और आपको output voltage को step up करना है? तो switching regulators इसे handle कर लेगा.
  • अगर आपका design को अची power conversion efficiency चाहिए तो भी आप switching regulators लेंगे ये 85% efficiency देता है.
  • अगर आपको cost में problem है तो आप linear regulator को चुने.


जैसा की हम जानते है switching regulators तीन प्रकार होते है. अब हम एक एक कर सबको पढेंगे.

Step Up Voltage Regulator:

Step-up switching converters जिसे हम boost switching regulators भी कहते हैं. यह हमे input voltage को raise कर high output voltage देता है. Output voltage तब तक ही regulate होगा जब तक Circuit के output power specification के अन्दर अगर power draw किया जाए.  LEDs के string को drive करने के लिएstep up switching regulation का इस्तेमाल होता है.

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मान लीजिये की ये lossless circuit hai जहाँ Pin= Pout (input औरoutput powers same है)

    Vin Iin = Vout Iout ,

  Iout / Iin = (1-D)

इन सबसे, इस circuit से हमे infer मिलता है:

  • Power same रहता है.
  • Voltage increase होता है.
  • Current decrease होता है.
  • DC transformer के equivalent है.

Step Down (Buck) Voltage Regulator:

यह input voltage को low कर देता है. यह technique variable input के base पर low regulated output voltage produce करता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे linear regulator काम करता है.Step Down (Buck) Voltage Regulator

अगर input power output power के बराबर होता है, तब

Pin = Pout; Vin Iin = Vout Iout,

Iout / Iin = Vin /Vout = 1/D

Step down converter DC transformer के equivalent होता है जहाँ turns ratio का range 0-1.

Boosting/Bucking (Inverter):

यह technique hybrid जैसा है, जो designer यह ability provide करता है की वह output voltage को step up, step down या invert कर सके.

Overall, अगर आप sophisticated design के साथ काम कर रहे हैं जहाँ power conversion efficiency बहुत बड़ा concern है और input और output voltage का difference भी high है तो आप switching regulator का इस्तेमाल करें.

Boosting / Bucking (Inverter)

  • Output voltage input voltage के opposite polarity का होता है.
  • यह achieve करने के लिए off time में VL forward-bias और diode reverse bias होता है. जो off time में current produce और voltage production के लिए capacitor को charge करता है.
  • इस type के switching regulator से 90% efficiency achieve किया जा सकता है.

Alternator Voltage Regulator:

Alternator current produce करता है जिसकी ज़रुरत तब होती है जब engine run हो रहा हो और ये vehicle की electrical demand को पूरा करता है. यह वो भी energy को replenish करता है जो vehicle को start करने में जाती है. Alternator के पास यह ability है वो lower speed के वक़्त ज्यादा current produce करता है. यह DC generator से भी ज्यादा current produce करता है. Alternator के दो parts होते हैं-

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Stator– यह stationary component है जो move नहीं होता है. इसमें set of electrical conductors होते हैं जो iron core पर coils में wound होते हैं.

Rotor/Armature– यह moving component है जो rotating magnetic field produce करता है. इसे produce करने के लिए उसके पास तीन ways हैं:

  1. Induction
  2. Permanent magnets
  3. Exciter का use करके.

Electronic Voltage Regulator:

एक simple voltage regulator resistor को diode के साथ series में रख कर बनाया जा सकता है. Diode का V-I curves logarithmic shape का होता है इसलिए input में changes या current drawn में changes होने के बावजूद diode के across voltage बहुत slightly change होता है. जब precise voltage control और efficiency important नहीं होता है तब यह design इस्तेमाल करने के लिए अच्छा है.

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Transistor Voltage Regulator:

Electronic voltage regulators के पास astable voltage reference source जो Zener diode provide करता है, जो reverse breakdown voltage operating diode भी कहा जाता है. यह constant DC output voltage maintain करता है. AC ripple blocked होता है पर filter block नहीं हो सकता है. Voltage regulator के पास circuit protection, current limiting circuit, over voltage protection,  और thermal shutdown के लिए extra circuit present होता है.

Transistor Voltage Regulator:

उम्मीद है आप सभी को voltage regulator के सभी concept clear हो गए होंगे. यह article आपको पसंद आए तो like करना ना भोले.

Nitin Arya

He is lucky be to a fast-growing YouTuber. Like every third person now in india, he is an engineer, working as manager in public sector. A photographer and a science teacher who usually deviates to the miracles of science rather than completing syllabus.

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