VAR Technology: FIFA 2018 | Kya hai ye Technology

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FIFA-2018 में जबरदस्त Technology

 

fans stadium field sport
FIFA-2018

FIFA 2018 का बुखार हर किसी के सर चढ़ कर बोल रहा है. जिधर देखो फुटबॉल की चर्चा है और India भी इससे अछूता नहीं है. इसके आलावा जो फुटबॉल में जम कर चर्चा है वो है इस साल लांच हुई revolutionary technology की जिसका नाम है. Video Assistant Referee यानी की VAR. ऐसी technology जिसके बार में पूरे वर्ल्ड में, बियर bars में, Stadium में और मास्को से लेकर मेल्बर्न में चर्चा है.

इससे पहले इस तरह की technology का इस्तेमाल सिर्फ टेनिस और Rugby में ही होता था. इसी साल से फुटबॉल के इतिहास में इसका इस्तेमाल होना शुरू हुआ है. हालांकि शूरू होने के बाद ही इसमें controversy होनी शुरू हो गयी है. आइये देखते हैं क्या कहानी है इस technology की.

 

क्या है VAR technology.

 

मैच कहीं भी हो रहा हो VAR की टीम का सेंट्रल ऑपरेशन रूम Russia में Moscow में स्थापित होगा. इस technology को हैंडल करने के लिए ४ लोगो की टीम होगी. जिसमे एक लीड विडियो ऑफिसियल होगा और बाकी ३ उसके असिस्टेंट होंगे. ये लोग ३३ high standard technology camera को एक्सेस करेगा जिसमे की १२ camera slowmotion कमरा हैं. इसके आलावा इस टीम के पास २ अलग से cameras की व्यबस्था होगी हो जो कि कम्पुटर की हेल्प से generated algorithm से offsides को डिटेक्ट कर लेगा. नाकआउट फेस में एक अलग से Ultra slowmotion camera होगा जो की हर गोल को मॉनिटर करेगा.

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Control room VAR | Courtsey: FIFA

काम कैसे करती है ये technology

 

मैदान पर जो भी रेफ़री होते हैं वो continuosly VAR ऑफिसियल के साथ टच में रहते हैं. कंप्यूटर एनालिसिस करके बताता है अगर कोई गलती हुई है और ये information, डायरेक्टली फील्ड umpire को बता दी जाती है. अगर VAR को ये लगता है की मैदान पर रेफ़री ने कोई गलती की है तब भी ऑफिसियल मैच रेफ़री को हेडसेट की सहायता से बताता है की क्या गलती हुई है. अगर मैदान पर रेफ़री को किसी particular केस में डाउट लगता है तो वो भी सीधा VAR टीम से संपर्क करके सही decision पूछ सकता है.

man in black fitted cap holding black corded headset

 

अगर मैच दूसरी कंट्री में भी खेला जा रहा है तो, फाइबर लिंक्ड रेडियो सिस्टम की सहायता से ये communication बिना delay के किया जाता है. इसकी सबसे ख़ास बात ये है की VAR system decision नहीं लेता है सिर्फ on-field रेफ़री को सुग्गेस्ट करता है. फाइनल decision on field रेफ़री का ही होता है.

अभी कई गेम्स में VAR का काफी रोल रहा है decision लेने में और आप ये France और Sweden के बीच मैच में गलत पेनल्टी बचाने में आप  देख ही चुके हैं. आपका क्या मानना है इस technology के बारे में बताइए हमे कमेंट सकतीं में.

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