Ultrasonic Sensors ( अल्ट्रासोनिक सेन्सर्स ) क्या है? वर्किंग और एप्लीकेशन

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आप सभी का इस electronics column में एक बार फिर से स्वागत है. आपने  इस column में   bio –sensor, level sensor इत्यादि के बारे  में पढ़ा होगा।  चलिए आज हम एक और sensor  के बारे में पढ़ते हैं। आपने अपने ज़िंदगी में इसका इस्तेमाल किया होगा पर शायद आप इस सेंसर से परिचित ना हो। तो चलिए इस sensor के बारे में हम जानते हैं. तो आज हम Ultrasonic sensor के बारे में पढ़ेंगे।           

Introduction:

Ultrasonic sensor एक specific frequency का sound wave send करता है ताकि respective object और sensor के का distance measure करके बता सके. इस सेंसर से निकली sound wave जब उस object के साथ collide करता है तो वह sound wave reflect हो जाता है और यह reflected sound wave ultrasonic receiver receive करता है. Object का distance sound wave के sending और receiving time से calculate होता है. यह कांसेप्ट आपने echo में अपने physics की books में भी पढ़ा होगा. Distance को measure करने का formula नीचे दिया गया है.

 Distance = Sound speed x time taken / 2

Sound हवा में 344m/s (1129ft/s) के speed के साथ travel करता है और यह speed sound wave के total time (sending और receiving) के साथ multiply किया जाता है. इस formula में wave के आने और जाने का total time count किया जाता है इसलिए respective object का total distance calculate करने के लिए 2 से divide किया जाता है.

वैसे तो ultrasonic लेवल, distance और फ्लो जाने के लिए काफी efficient टेक्नोलॉजी है पर कभी कभी ultrasonic sensors से कुछ object detect नहीं हो पाते हैं क्यूकि wave जिस ऑब्जेक्ट से टकरा कर वापस आनी होती है, उस object का shape improper होता है या उसकी size छोटी होती है.

Ultrasonic sensor के circuit diagram का working:

नीचे दी हुई circuit diagram ultrasonic sensor का है.

Ultrasonic sensor circuit diagram

Ultrasonic sensor circuit ultrasonic transmitter और receiver के set  का बना होता है जो same  frequency पर operate  होता है. जब कोई object circuit के  ट्रांसमिशन के area में आता है तो उसकी reflected sound की frequency  receiver को मिलती  है.   Ultrasonic  सेंसर circuit  बहुत sensitive  होती है और यह एक पल्स भेजने के बाद अगली पल्स भेजने के लिए automatically reset हो जाता है. Sensor में दो NAND gates होते हैं जो की inverter की तरह wired होते हैं ताकि multi vibrator output बन सके जो transducer को drive कर सके .

इसके circuit में दो trimmers P1 और P2 होते हैं. P1 inverting और non -inverting circuit के amplification को adjust करने का काम करता है. P2 transmitter के output frequency को adjust करता है. Transducer output signal को receive करता है जो collision के कारण reflect होता है और यह signal, resistor TR 3 से amplified होता है.    

Ultrasonic Sensor के अलग अलग प्रकार:

Ultrasonic  sensors  के mainly  4 प्रकार इस्तेमाल  होते हैं।

  1. Ultrasonic Proximity Sensors
  2. Ultrasonic 2 Point Proximity Switches
  3. Ultrasonic Retro-reflective Sensors
  4. Ultrasonic Through Beam Sensors

चलिए अब इन सभी sensors की working देखते हैं।

Ultrasonic Proximity Sensors

Ultrasonic proximity sensors में एक special type का  sonic transducer  होता है जो sound wave के alternate transmission और reception का काम करता है। यह sonic transducer sonic wave emit करता है जो object से टकरा कर reflect हो जाता है और इस emission के कारण sensor receiver mode में switch हो जाता है। Sound wave के emitting और receiving के प्रक्रिया में जो  total time लगता है वो sensor से object के distance के inversely proportional होता है।   Detection area में सिर्फ digital output ही sense होता है। Sensing range को हम sensor की  potentiometer से adjust कर सकते हैं।

Ultrasonic Proximity Sensors

Ultrasonic 2 Point Proximity Switches:

अगर आपको डिटेक्शन रेंज में किन्ही २ पॉइंट्स के बीच कि distance पता करनी है तो आप इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस sensor में 2 points के लिए switching provide किया जाता है, इसलिए इसे  2-point proximity switches भी कहते हैं। यह लगभग standard sensor से  similar ही होती है लेकिन यह 2-touch set up key के साथ differ करता है और यह function Teach-in function कहलाता है। इसकी switches points Sde1 और  Sde2 sensing range में आराम से Teach-in button की मदद से  program किये जा सकते हैं।

Ultrasonic 2 Point Proximity Switches

Ultrasonic Retro-reflective Sensors:

Ultrasonic retro-reflective sensor का operation ultrasonic proximity sensor जैसा ही होता है। इसमें सिर्फ इतना difference है की sensor से reflector तक की distance propagation time को measure कर पता चलता है। इस sensor में एक  stationary object reflector की तरह काम करता है और इसकी sensing distance को ultrasonic sensor में potentiometer resistance को adjust करके घटाया या बढ़ाया जा सकता है। इसकी working बहुत आसान  है, जब भी कोई object इसकी sensing distance में आती है तो propagation time change हो जाती है और इसी propagation time को change कर sensor active mode में switch हो जाता है।  यह sensor sound absorbent और  object deflecting sound की detection को allow करता है।

Ultrasonic Retro-reflective Sensors:

Ultrasonic Through Beam Sensors

Ultrasonic thru-beam sensors दो अलग अलग कॉम्पोनेन्ट होते हैं जिसमे एक wave emitter होता है और दूसरे end पर एक रिसीवर होता है. कैलकुलेशन और switching पार्ट सब receiver में लगे होते हैं.

emitter continuously एक बीम भेजता रहता है जिसे रिसीवर डिटेक्ट करता रहता है. किसी ऑब्जेक्ट के बीच में आने से जैसे ही ये इंटरप्ट होती है, सेंसर switching आउटपुट activate हो जाता है.

Ultrasonic Through Beam Sensors

सेंसर की sensitivity को potentiometer से एडजस्ट किया जा सकता है.

Ultrasonic Sensor के Applications :

  1. Ultrasonic sensor का उपयोग oil, chemical, milk या  water tanks में level measurements या  liquid level control के लिए होता है।
  2. यह सेंसर robotic industry में  robot sensing के लिए भी होता है।
  3. इस sensor का इस्तेमाल car parking system में भी होता है जहाँ car entry barrier system के through controlled की जाती है। जब कोई गाड़ी नीचे होती है तो barrier को नीचे नहीं लाया जाता है और ये पूरा process ultrasonic sensor के through control होता है।
  4. यह sensor car बनाने की factory में car को automatically assemble करने में मदद करती है।
  5. यह sensor bottle cutting और  drink filling machines में भी उपयोग होता है जहाँ bottle कई जगहों पर detect होता है और इस continuous monitoring के लिए   ultrasonic sensor का उपयोग होता है।
  6. wireless charging
  7. Embedded system
  8. Burglar alarms
  9. Medical ultrasonography

Ultrasonic sensor के Advantages:

  1. Ultrasonic sensor की qualities -high frequency, high sensitivity and high penetrating power होती है जिसके कारण वो वह external या बहुत गहरी objects को भी detect कर पाता है।
  2. ये sensors  आसानी से microcontroller या किसी भी प्रकार के controller साथ interface किए जा सकते हैं।
  3. ये sensors किसी भी specific objects का nature, shape और  orientation अपने sensing area में आसानी से sense कर लेता है।
  4. ये sensors के पास किसी भी parallel surface की thickness और depth measure करने की accuracy किसी दूसरे methods से ज़्यादा होती है।
  5. ये sensors आसानी से उपयोग किए जा सकते हैं और ये dangerous नहीं होते।

Ultrasonic Sensor के Disadvantages:

  1. Ultrasonic sensor की testing करते वक़्त यह बहुत ज़रूरी है की आप operational manual को पढ़े. इनकी सेटिंग थोड़ी सी ट्रिकी हो सकती हैं.
  2. जब यह sensor को किसी microcontroller के साथ interface करते  वक़्त कोई exprerienced person या programmer के निगरानी में किया करें।
  3. जब sensors को आप inspection purpose के लिए उपयोग करते हैं तो water resistant का ध्यान रखे वरना damage हो सकते हैं।

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