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ट्रांसफार्मर ( Transformer ) क्या है? कितने प्रकार के होते हैं ?

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हैल्लो दोस्तों, आप सभी का एक बार फिर से इस इलेक्ट्रॉनिक्स column में स्वागत है. हमे हमेशा यह सिखाया जाता है की हमे कभी ज्ञान से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए. ज्ञान जहाँ से अर्जित हो सके हमे अर्जित करना चाहिए. बस इसी सोच को लेकर हम फिर एक नए विषय पर चर्चा करने के लिए उपस्थित हैं.

तो चलिए सबसे पहले जानते है इस article का विषय और हम इसे क्यों पढ़ रहे हैं और इसमें क्या-क्या पढेंगे.

Transformer hindi me

आज के article का विषय Transformer है . Transformer के concepts जैसे working principle, construction, tansformer के types, losses, efficiency और applications के बारे में भी हम पढेंगे. इन्हें हम दो आर्टिकल में ब्रेक करेंगे.  अब सबसे अहम् सवाल हम transformer के बारे में पढ़ क्यों रहे हैं ? दोस्तों आप सभी को पता होगा की आपके घर में जो बिजली आती है उसे आपके घर तक पहुचाने में यह transformer बहुत ही अहम् भूमिका निभाता है . यह electrical energy के transformation के लिए उपयोग किया जाता है . यह transformation के concept ने electrical field को revolution कर दिया है और हमारी ज़िंदगी को पहले से भी और आसान और बेहतर बना दिया. Transformer के कई advantages होते हैं जिसके कारण यह electrical engineering की core की तरह काम करता है .  आप में से कई ने transformer देखा होगा और यह सवाल भी मन में आया होगा की आखिर यह काम कैसे करता है ! तो चलिए आज सभी सवालों का जवाब ढूँढ़ते हैं.

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सबसे पहले हम transformer से परिचय करते हैं.

Transformer kya hai ?

Transformer electrical system में एक बहुत ही common device की तरह पाया जाता है जो अलग –अलग operating voltages पर काम कर रही circuits को link करता है . यह ज़्यादातर उन applications में उपयोग होता है जहाँ AC voltage conversion एक voltage level से दुसरे voltage level पर होता है .

जैसे भी electrical equipment या device या load में ज़रुरत होती है वैसे ही Transformer का हम AC circuits में  voltages और currents को increase या decrease करने में उपयोग करते हैं.  अलग अलग applications अलग variety के transformer जैसे power, instrumentation और pulse transformer का उपयोग करते हैं.  

अगर विस्तार से देखा जाए तो transformer दो types के category के होते हैं, electronic transformers और power transformers. Electronic transformers बहुत ही low voltages पर operate करता है और वो low power levels में rate किये जाते हैं. ये transformer electronic equipment में उपयोग होते हैं जैसे televisions, personal computers, CD/DVD players, और दूसरे devices.

Power transformer का term उन transformers को refer किया जाता है जो high power और high voltage rating के होते हैं . ये अधिकतर power generation, transmission, distribution और utility systems में उपयोग होता है ताकि voltage levels को increase या decrease किया जा सके . लेकिन फिर भी, इन दोनों types के transformer में एक जैसा ही operation involve होता है .

Electric Transformer कैसे काम करता है

यह transformer एक static device है (जिसका मतलब है कोई भी moving parts present नहीं हैं ) जिसमे एक, दो या उससे ज्यादा windings  होते हैं और वो magnetically coupled होते हैं  और वो magnetic core के साथ या उसके बिना भी electrically separated होते हैं . यह electrical energy को एक circuit से दूसरे circuit में electromagnetic induction principle के द्वारा transfer करता है .

Winding AC main supply से connected होता है और इसे हम primary winding कहते हैं और जो winding load या जहाँ से energy को draw किया जा रहा है वहाँ से connected होता है उसे secondary winding कहते हैं. ये दोनों windings proper insulation के साथ laminated core पर बंधे रहते हैं जिससे दोनों windings के बीच में magnetic path provide होता है.

Transformer working

जब primary winding alternating voltage source के साथ energized होता है , तो alternating magnetic flux या field transformer core में produce होती है . यह magnetic flux का amplitude उसके applied voltage magnitude, supply की  frequency और primary side पर number of turns पर depend करता है .

यह flux core के through circulate होता है और secondary winding के साथ link करता है . Electromagnetic induction के principle के अनुसार यह magnetic linking secondary winding में voltage induce करता है. इसे हम दो circuit के बीच का mutual induction कहते हैं. Secondary voltage magnetic flux, frequency और secondary windingsके number of turns पर depend करता है.

Transformers electrical power systems में extensively उपयोग होता है ताकि voltage और current के variable values same ही frequency पर produce हो सके. इसलिए , primary और secondary turns का proportion appropriate रख कर desired voltage ratio transformer में obtain किया जा सकता है. अब हम Transformer का construction पढेंगे.

Transformer का construction:

Transformer के main parts – core, windings, container या tank, bushings, coservator और radiators होते हैं.

Core:

High power applications के लिए, transformer core high permeability material का बना होता है जिससे magnetic flux के लिए low reluctance path provide करता है . Core का cross section square या rectangular होता है .

 वैसे तो iron core transformers, air core transformers के मुताबिक बेहतर power transformation provide करता है.  Air core transformers का उपयोग high frequency application(2 KHz के above) के लिए उपयोग किया जाता है. जबकि low frequency applications (2khz के नीचे) के लिए iron core transformers का ही उपयोग होता है.

सभी types के transformers में, core silicon steel या sheet steel laminations से बना होता है. और वो assemble किया जाता है ताकि flux के लिए continuous magnetic path provide किया जा सके. इस laminated core के साथ eddy current losses को minimize किया जाता है.

ये steel की laminated sheets की thickness 0.35 से 5 mm तक की होती है और varnish, या oxide, या phosphate के साथ insulate किया जा सकता है और फिर core formed होता है.

Better magnetic properties के लिए , Hot rolled grain oriented (HRGO) steel, या Cold Rolled Grain Oriented (CRGO) steel, या High B (HiB) laminations का उपयोग होता है. Small transformers के case में, core hot rolled silicon steel laminations के साथ construct किया जाता है .

Windings:

Generally, यह (दो windings) transformer के दो windings होते हैं जिसका नाम primary और secondary windings होता है और high grade copper से बना होता है.

Insulated stranded conductors windings की तरह उपयोग होता है ताकि वो high currents carry कर सके. यह insulation एक turn को दूसरे turn के contact में आने से रोकता है.

Transformer Windings

Primary windings से जो voltage connected होता है उसे हम primary voltage कहते हैं. वही जो secondary windings में जो voltage induce होता है उसे secondary voltage कहते हैं. अगर secondary voltage primary voltage से ज्यादा होता है तो इसे step-up transformer कहते हैं और अगर यह कम होता है तो इसे step-down transformer कहते हैं. इसलिए windings को voltage levels के base पर  HV और LV windings designate किया गया है.

LV windings के comparison में, HV windings को ज्यादा insulation की ज़रुरत होती है ताकि high voltage को वो withstand कर सके और core और body से ज्यादा clearance की भी ज़रुरत होती है.

Transformer के coils  concentric या sandwiched coils होते हैं.  Concentric coils core type transformers में उपयोग होता है जबकि sandwiched coils को shell type transformer में उपयोग किया जाता है.  Concentric arrangement में, LV winding core के पास रखा जाता है और HV winding LV winding के around रखा जाता है ताकि low insulation हो सके और clearance requirements पूर्ति हो सके.  Transformer में सबसे ज्यादा helical, sandwiched, disc और cross over coils का इस्तेमाल होता है.

Transformer के दूसरे necessary parts जैसे conservator tank भी होते हैं. इसका उपयोग necessary oil storage provide करने में होता है ताकि oil का pressure heavy loads के under settle down हो सके. जब transformer में oil को heat provide किया जाता है तो यह natural है की oil expand और contract होता है. उसके बाद भी oil को heavy pressure provide किया जाता है तो यह बिना conservator tank के transformer में burst हो जाता है. अब हम transformers के classification के बारे में पढेंगे.

Transformer के classification :

Transformer कई प्रकार के types में classified होता है  लेकिन यह कई factors पर depend होता है जैसे voltage ratings, construction, cooling का type, AC system के number of phases, कौन सी जगह पर है इत्यादि. आज हम यहाँ इसके कुछ types को पढेंगे.

Function के आधार पर:

Transformer को voltage level के conversion के base पर दो types में classify किया जाता है. ये step-up और step-down transformers होते हैं.

Step-up transformers:

 Step-up transformer में , secondary voltage primary voltage से ज्यादा होता है. यह इसलिए होता है क्युकि primary में secondary से  number of coils कम होते हैं. इस प्रकार का transformer voltage को और higher level के voltage में raise करता है. ये transmission systems में उपयोग होते हैं और higher power levels पर rate किए जाते हैं.

Step-down Transformers:

Step-down transformer में, secondary voltage primary voltage से कम होता है क्युकि secondary windings में primary windings से कम number of turns होते हैं. इसलिए , इस type के transformer का उपयोग voltage को एक specified level तक reduce कर देता है. ज़्यादातर power supply step down transformer का इस्तेमाल करते हैं ताकि circuit के operating range को एक specified safer voltage limit में रखा जा सके. इस type के transformer का उपयोग distribution systems (power transformers) और electronic circuits (electronic transformers) में होता है. 

यह देखा गया ही की transformer एक reversible device है इसलिए यह step-up और step-down transformer दोनों ही transformer की तरह काम करता है. जैसे, अगर circuit को high voltage की ज़रुरत रहती है तो हम load में HV terminals connect कर देते हैं  और जहाँ पर load या circuit में low voltage की ज़रुरत होती है वहां हम load से LV terminals connect करते हैं.

Step up vs step down transformer

Transformer का voltage का ratio उसके turns ratio से determine होता है. Winding में जितने larger number of turns होंगे उतना ज्यादा voltage produce होता है. इसलिए, एक step down transformer में secondary coil पर कम number of turns होते हैं ताकि low voltage produce कर सके और primary पर ज्यादा turns होते हैं ताकि AC supply high voltage withstand कर सके.

Turns Ratio = Primary Voltage/ Secondary Voltage = Primary Turns/ Secondary turns

Turns ratio होता है, VP /VS = NP /NS

Core Construction के आधार पर:

Construction के basis पर , transformers core के around जो windings रखी जाती है उसके मुताबिक दो type में classify किया जाता है . ये core और shell type transformers होते हैं.

Core Type transformer:

Core type transformer

इस प्रकार के transformer में , core के considerable part को windings से surround किया जाता है. Generally, distribution transformers core type के होते हैं. कुछ large power transformers भी shell type के होते हैं.

Core type transformers में Form-wound, cylindrical coils का उपयोग होता है और ये coils शायद rectangular, या oval, या circular sizes के होते हैं. Small size core type transformer के लिए एक simple rectangular core के साथ cylindrical coil होता है जो की circular या rectangular form में उपयोग होता है.

और large size core type transformer के लिए, cruciform core के साथ round या circular cylindrical coils का इस्तेमाल होता है. ज़्यादातर core type transformers में , cylindrical coils का उपयोग होता है क्युकि उसकी mechanical strength अच्छी होती है. ये cylindrical coils helical layers में wound होते हैं और एक दूसरे से insulating material जैसे cloth, paper, mica इत्यादि उपयोग कर insulated होते हैं .

LV winding को HV winding के compare में insulate करना आसान है; इसलिए इसे core के पास रखा जाता है.

Shell Type Transformer:

shell type transformer में, iron core copper windings का considerable portion surround करता है और वो core type transformer का reverse case होता है. इस type में भी, coils former wound किए जाते हैं लेकिन ये multilayer disc type coil होते हैं जो की pancakes के form में wound किए जाते हैं. ये multilayer disc coils जो की अलग अलग layer में होते हैं वो एक दुसरे से paper से separated होते हैं. पूरा windings stacked discs से बना होता है और coils के बीच बीच में insulation space provide की जाती है ताकि horizontal insulating और cooling ducts बन सके.

Shell type transformer

Berry transformer सबसे ज्यादा Shell type transformer की तरह इस्तेमाल होता है. Shell type में , core के तीन limbs हैं और windings central limb के around wound होता है. LV windings और HV windings दोनों different coils में divide होते हैं और alternately arrangement की जाती है. LV windings के बीच में , HV windings रखी जाती है. Insulation requirements को reduce करने के लिए, LV windings को core के adjacent में रखा जाता है. इस type के construction को high rating transformers के लिए prefer किया जाता है.  

Supply के Nature के आधार पर:

Supply के nature के आधार पर, transformers single या three phase transformers होते हैं. Single phase transformer design किया जाता है ताकि single phase system के लिए काम हो सके; इसलिए इसके दो windings होते हैं जो voltage levels को transform करता है. ये power distribution transformer के remote ends में उपयोग होता है. इनके three phase transformers के compare में less power ratings होती हैं. ये core type construction में ज़्यादातर उपयोग होती है. 

Three phase system के साथ काम करने के लिए, हमे three single phase transformers की ज़रुरत होती है. इसलिए, एक economic advantage के लिए, three phase operation के लिए three phase transformer को consider किया जाता है. इसके तीन windings या coils होते हैं जो proper way में connected होते हैं ताकि input voltage को match कर सके. इस type के transformers , primary और secondary windings load voltage requirements के अनुसार star-delta या delta-star fashion के form में connected होता है.

Use के आधार पर:

  1. Power transformer
  2. Distribution transformer
  3. Instrument transformer

अन्य प्रकार के Transformer:

Cooling के type के base पर ये निम्न्लिखित रूप से classified होते हैं:

  1. Self air cooled transformer
  2. Air blast cooled transformer
  3. Oil filled self cooled transformer
  4. Oil filled water cooled transformer
  5. Oil filled forced oil cooled transformer

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