Thyristor ( थायरिस्टर ) क्या है? History एंड कंस्ट्रक्शन

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दोस्तों आप सभी का इस इलेक्ट्रॉनिक्स column में स्वागत है. आप सबने Transistor के बारे में पढ़ा ही होगा जो कि हमने switching के लिए काफी इस्तेमाल किया. पर ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल low वोल्टेज लेवल switching तक सीमित है. तो चलिए आज हम एक और electronic component के बारे में पढ़ते हैं. जी हाँ इस tutorial में आज हम Thyristor के basics के बारे में पढ़ेगे. हम Thyristor के origin जो (Thyratron और Transistor) है, और Thyristor के applications के बारे में पढेंगे. तो चलिए अब शुरू करते हैं और सबसे पहले Introduction देखते हैं.

Thryristor क्या है ?

आजकल कई सारे  household appliances के electromechanical या electrical equipments, जैसे industrial power और  motor control equipments के लिए uninterrupted power supplies, power electronic circuits से बने होते हैं जिनमे Thyristors solid-state switching device में एक important role play करता है. Power control के conventional methods के लिए  variable tap-changing transformers, shunt और series regulators का उपयोग होता है ताकि variable voltage steps में produce हो सके. लेकिन यह सब cost effective और inefficient है. बाद में magnetic amplifiers का आविष्कार हुआ ताकि power का static control ज्यादा reliability के साथ produce कर सके. हालाँकि Controllers की bulkiness और less efficiency के कारण ये कुछ applications तक ही limited हैं.

Thyristor in Hindi

Thyristor की history

Power control का development electronic methods के साथ में शुरुआत thermonic और gas-discharge valve का उपयोग कर हुआ था. इन devices में mercury arc converters,  thyratrons और ignitrons होता था. यह Thyratrons gas-filled triodes होते थे जो particularly heavy currents को switching करने में मदद करते हैं.

Semiconductor technology में rapid development के साथ, electronic circuits का miniaturization होने लगा जिससे ये thermonic valves और gas-discharge valves replace हो गए और बहुत सारे industrial applications में power diodes और power transistors का उपयोग होने लगा.

Fabrication technology में एक नया trend आया जिसने thyristors को develop किया जो gas tube thyratrons के characteristics से similar था. Thyristor का नाम दो शब्द के combination से derive होता है –thyratron और transistor. Improved reliability, increased temperature performance और lower manufacturing costs के कारण ये thyristors बहुत साड़ी applications में अधिकतर बार इस्तेमाल होता है.

Thyristors का पहला prototype 1957 में General Electric कंपनी द्वारा introduce हुआ था. तब से लेकर आज तक, fabrication developments के साथ और बहुत सारी industrial applications में adaptability हुई, दुसरे devices devices जो similar characteristics introduce हुई और thyristor family के under में आते हैं. इस device का basic material silicon है और इसलिए इसका नाम भी Silicon controlled rectifiers (SCR’S)  है. लेकिन generally यह consider किया जाता है की SCR thyristor family का सबसे पुराना member है.

दोस्तों अब हम thyristor कैसे बना है उसके बारे में पढ़ेगे. नहीं समझे? यानी उसका structure.

Thyristor का structure:

Thyristor एक four layer(alternate P और N type materials का ) three terminal device है , जो की commonly adjustable rectification circuits के लिए इस्तेमाल होता है. ये terminals anode, cathode और gate है. ये दो terminals anode और cathode load के साथ  series में connected होते हैं और current को gate terminal के through control किया जाता है और उसके through handle करता है . 

Structure of thyristor

Thyristors इस तरह design किए जाते हैं की वो high energy levels(voltage और currents का ) handle कर सके जो की approx. 1KV और 100A से ज्यादा होता है. यहाँ तक की high rated SCR भी low voltage supply(जो 10W और 1A है) से switch या control किए जा सकते हैं. अत: SCR या thyristor के कारण बहुत अच्छी control capability हमे मिलती है.

जैसा की हमने आपको बताया की SCR thyristor का सबसे पुराना member है लेकिन लोग SCR और thyristor को same ही समझते हैं क्यूकि SCR को ही अधिकतर जगह इस्तेमाल किया जाता है. जैसे फोटोकॉपी के लिए xerox जबकि xerox कंपनी का नाम है.   

SCR या thyristor एक four layered, three junction semiconductor switching device है. इसके तीन टर्मिनल है anode, cathode और gate. Thyristor एक unidirectional device है जैसे की diode, जिसका मतलब current सिर्फ एक ही direction flow कर सकता है. इसमें PN junction series में होता है तभी ये four layers के होते हैं. Gate terminal का इसतेमाल SCR को trigger करने के लिए होता है, उसके terminal पर small voltage provide किया जाता है, जिसे gate triggering method कहते है ताकि SCR turn on हो सके. अब हम Thyristor को analogy (मतलब internal structure) के बारे में पढेंगे.

Thyristor के Two Transistor Analogy:

यहाँ दो transistor का equivalent circuit दिखाया गया है जिसमे PNP transistor T1 के base को NPN transistor T2 के collector current से fed किया जाता है. और transistor T1 के collector current को transistor T2 के base में feed किया जाता है. इसलिए दोनों transistor की conduction एक दुसरे पर depend करता है. अत: जब तक कोई भी एक transistor के base को base current नहीं मिल जाता तब तक वो conduct नहीं करेगा. अगर anode और cathode के बीच में voltage present हुई तब भी thyristor conduct नहीं करेगा. अगर किसी application में जैसे अलार्म circuit जहाँ पर उसे एक बार trigger होने के बाद हमेशा ON रहना है तो वहाँ transistor का उपयोग नहीं होता. उसके लिए thyristor का उपयोग किया जाता है.

Thyristor के Two Transistor Analogy

Thyristor MOSFET difference

Thyristor और MOSFETदोनों ही electrical switches है और commonly use किए जाते हैं. इन दोनों के बीच में यह basic difference है की MOSFET switches voltage controlled device है और यह सिर्फ DC current को switch कर सकता है जबकि thyristors switches current controlled device होता है जो DC और AC current दोनों को switch कर सकता है .

कुछ और differences नीचे table में दी गई हैं.

PropertyThyristorMOSFET
Thermal Run awayहाँ
Temperature sensitivityकमज्यादा
TypeHigh voltage high current deviceHigh voltage medium current device
Turning offSeparate switching circuit की ज़रुरत होती हैनहीं है ज़रुरत
Turning OnSingle pulse की ज़रुरतContinuous supply की कोई ज़रुरत नहीं सिर्फ turning On और Off के वक़्त पड़ती है.
Switching speedकमज्यादा
Resistive input impedanceकमज्यादा
ControllingCurrent controlled deviceVoltage controlled device
Thyristor MOSFET difference

तो दोस्तों ये था, thyristor का इंट्रोडक्शन, history, analogy और कैसे ये MOSFET से अलग है. पर अभी काफी कुछ बाकि है जैसे कि टाइप्स, वर्किंग और एप्लीकेशन जो हम अगले आर्टिकल में देखेंगे.

और हाँ, आपके पास भी है कोई जबरदस्त टेक्नोलॉजी से रिलेटेड मसाला और आपको है लिखने में जरा सा भी इंटरेस्ट तो आप हमे अपने आर्टिकल्स aryan.yudi@gmail.com पर भेज सकते हैं. हम पब्लिश करेंगे अपनी वेबसाइट पर.

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