Thyristor types, working & Application Hindi me

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दोस्तों उम्मीद है आप सभी को thyristors, transistors और thyratron के बीच का difference पता चल गया होगा. आगे हम thyristors की types के बारे में पढेंगे.

Thyristors के types:

Thyristor family devices को different types में classify किया जाता है जो की अलग अलग applications के लिए बनाए जाते हैं. Gate terminal पर triggering signal के कारण thyristor turn on हो जाता है और उसका turn off operation power circuit configuration पर depend करता है. इसलिए thyristors में external controllability सिर्फ turn on के लिए होती है.

Thyristors के types

हालाँकि कुछ thyristors (जो नीचे दिए गए list में है) में external controllable circuitry होती है जो gate या base terminal के through thyristor को turn on और turn off दोनों करती है. Thyristors के कुछ types नीचे दिए गए हैं:

  • 1. Phase Controlled Thyristors
  • 2. Asymmetrical Thyristors (ASCRs)
  • 3. Inverter-grade Thyristors (fast switching speed SCRs)
  • 4. Reverse Conducting Thyristors (RCTs)
  • 5. Bidirectional Diode Thyristors (DIACs)
  • 6. Gate Assisted Turn-off Thyristors (GATT)
  • 7. Bidirectional Triode Thyristors (TRIACs)
  • 8. Silicon Control Switch (SCS)
  • 9. Silicon Bilateral Switch (SBS)
  • 10. Silicon Unilateral Switch (SUS)
  • 11. Light Activated Silicon Controlled Rectifiers (LASCRs)
  • 12. Static Induction Thyristors (SITHs)
  • 13. Gate Turn OFF Thyristors (GTOs)
  • 14. Static Induction Transistors (SITs)
  • 15. MOS Controlled Thyristors (MCTs)
  • 16. Field Controlled Thyristors (FCTs)
  • 17. MOS Turn OFF Thyristors (MTOs)
  • 18. Emitter Turn OFF Thyristors (ETOs)
  • 19. Integrated Gate Commutated Thyristors (IGCTs)

दोस्तों अब हम thyristor या SCR के V-I characteristics के बारे में पढेंगे. (voltage-current)

Thyristor या SCR के V-I characteristics:

Thyristor की V-I characteristics को obtain करने के लिए नीचे basic circuit दिया गया है. Thyristor का anode और cathode दोनों main supply से load के through connected हैं. Thyristor का gate और cathode source Es से fed किया गया है, जिसका उपयोग gate से cathode तक gate current को provide करने के लिए किया जाता है.

जैसा की आप characteristics diagram देख सकते हैं, SCR के तीन basic modes हैं: reverse blocking mode, forward blocking mode, और forward conduction mode.

अब हम एक –एक कर तीनो modes के बारे में पढेंगे.

Reverse Blocking Mode:

इस mode में cathode को anode के respect में positive terminal बनाया जाता है और switch S open रहता है. Junction J1 और J3 reverse biased होते हैं और J2 forward biased होते हैं. जब thyristor के across reverse voltage apply किया जाता है (VBR से कम होना चाहिए) तो device reverse direction में high impedance offer किया जाता है. इसलिए, thyristor को reverse blocking mode में open switch की तरह treat किया जाता है. VBR  reverse breakdown voltage है जहाँ avalanche effect occur होता है, अगर voltage VBR  से ज्यादा हो जाती है तो thyristor damage भी हो सकता है.

Forward Blocking Mode:

जब anode cathode के respect में positive होते हैं और gate switch open रहता है, तो thyristor को forward biased कहा जाता है. Junction J1 और junction J2 forward biased होता है और J2 reverse biased होते हैं. इस mode में, एक small current flow होता है जिसे forward leakage current कहते हैं, लेकिन ये बहुत छोटा होता है और ये SCR को trigger नहीं कर सकता है. इसलिए, SCR को forward blocking mode में भी open switch की तरह treat किया जाता है.

Forward Conduction Mode:

Gate circuit open ही रहता है और forward voltage increase होता रहता है, तो junction J2 पर avalanche breakdown occur होता है और SCR conduction mode में आ जाता है. हम SCR को कभी भी gate और cathode के बीच में positive gate pulse देकर turn ON कर सकते हैं. या फिर forward breakover voltage को anode और cathode के across देकर thyristor को ON किया जाता है.

दोस्तों जैसा की आपने पहले पढ़ा की SCR को on करने के लिए trigger करना पड़ता है तो हम इसलिए triggering के methods पढेंगे.

SCR या Thyristor के triggering methods:

SCR को trigger करने के लिए कई methods हैं:

  • Forward voltage triggering
  • Gate triggering
  • dv/dt triggering
  • Temperature triggering
  • Light triggering

Forward Voltage Triggering:

Anode और cathode के बीच में forward voltage apply करने पर, और gate circuit को open रख कर junction J2 को reverse biased में लाया जाता है. जिसके कारण J2 के across depletion layer बनता है. जैसे ही forward voltage increase होता है, तो एक stage आता है जब depletion layer गायब हो जाता है, और J2 पर avalanche breakdown में चला जाता है. इसलिए , thyristor conduction state में enter हो जाता है. जिस वोल्टेज पर avalanche occur होता है दोस्तों उसे forward breakover voltage VBO कहते हैं.

Gate Triggering:

यह method thyristor या SCR को turn on करने के लिए सबसे common, reliable और efficient तरीका है. Gate triggering में, SCR को turn on करने के लिए, gate और cathode पर positive voltage apply किया जाता है. जिसकी वजह से gate current rise होता है और inner P layer में charge inject किए जाते हैं और फिर forward breakover occur होता है. जितना high gate current होता है उतना हो low forward breakover voltage होता है.

जैसा की figure में दिखाया गया है की SCR में तीन junction होते हैं, अब SCR को turn on करने के लिए junction J2 को break होना पड़ता है. इस gate triggering method का इस्तेमाल करके gate pulse apply किया जाता है और junction J2 break किया जाता है. और SCR के junction J1 और J2 को forward biased किया जाता है, फिर SCR को conduction state में लाया जाता है. अत: यह current anode से cathode की तरफ जाता है.

आपने पहले जो दो transistor का model पढ़ा है उसके मुताबिक़ जब anode को cathode के respect में positive किया जाता है तो current anode से cathode की तरफ current तब तक flow नहीं किया जाता जब तक gate pin trigger नहीं होता है. जब current gate pin में flow करता है तो यह lower transistor को turn on कर देता है. जैसे ही lower transistor conduct करता है, तो यह upper transistor को भी turn on कर देता है. यह एक प्रकार का internal positive feedback है, इसलिए जब एक बार gate पर कोई pulse provide किया जाता है तो thyristor हमेशा ही ON condition में रहता है. जब दोनों transistor turn on होता है तो current anode से cathode की तरफ conduct करना शुरू करती है. इस state को forward conducting बोलते हैं और इसी तरह thyristor के off होने के बावजूद transistor latch करता है या permanently on रहता है . इसे turn off करने के लिए circuit को turn off करना पड़ता है.

dv/dt Triggering:

Reverse biased junction J2 में capacitor की characteristics acquire होती है क्यूकि junction के across charge present होता है, मतलब junction J2 capacitance की तरह behave करता है. अगर forward voltage अचानक से apply किया जाता है तो junction के through charging current जो होता है वो capacitance Cj को produce करता है उसके कारण SCR turn on हो जाता है.

Charging current ic  का formula नीचे है:

iC = dQ/dt = d(Cj*Va) / dt        (जहाँ, Va जंक्शन के across forward वोल्टेज है)

iC = (Cj * dVa /dt) + (Va* dCj / dt )

junction capacitance लगभग constant है इसलिए, dCj / dt zero है, फिर

iC = Cj dVa / dt

इसलिए, forward voltage की rise का rate dVa /dt high है, तो charging current ic ज्यादा है. अत: SCR को बिना gate signal के turn on करने में charging current बहुत important रोल play करता है.

Temperature Triggering:

जब thyristor forward blocking mode में होता है, तो ज़्यादातर applied voltage junction J2  के पास collect हो जाते हैं, यह voltage कुछ leakage current से associated होता है. जिसके कारण junction J2 का temperature बढ़ जाता है. इसलिए, temperature में increase होने के साथ depletion layer decrease हो जाता है और एक high temperature पर depletion  layer टूट जाता है और SCR turn on हो जाता है.

Light Triggering:

SCR को light से trigger करने के लिए, एक recess(या गढ़ा) inner p-layer से बनाया जाता है जैसा की figure में है. एक particular wavelength की beam of light irradiation के लिए optical fibre में direct की जाती है.  Light की intensity जैसे ही एक certain value से आगे बढती है SCR turn on हो जाता है.  इस type के SCR को light activated SCR(LASCR) कहते हैं. यह SCR HVDC(high voltage direct current) transmission system में इस्तेमाल होता है.

उम्मीद है दोस्तों आप सभी को यह article पसंद आया होगा और आपको gate triggering, और SCR कैसे operate होता है उसके विषय  में पता चल गया होगा. इसी तरह हमारे articles को पढ़ते रहिये.

हम अब thyristors के applications के बारे में पढेंगे.

Thyristors के applications:

Thyristors की high switching speed और high power handling capacity के कारण ये devices alternating current control applications जो की higher level की voltage या current पर rated होती है उसमे अधिकतर इसतेमाल किये जाते है. Thyristor को appropriate gate signal provide कर thyristors के द्वारा average output power control किया जाता है.

Application of thyristor

यही नहीं, जब thyristor forward biased होता है तो एक delayed gating signal output का phase control produce कर सकता है. यह phase controllability कम average voltage produce करता है और यह एक uncontrolled rectifier के द्वारा जो average voltage produce होती है उससे भी कम होती है.

यह thyristor की बहुत important application होती है. नीचे लिखे हुए application में thyristor को power control की तरह उपयोग किया जाता है.

  •  AC और DC motors में Speed Controllers की तरह
  •  DC और AC circuit breakers
  • Illumination (light dimmers) और temperature controllers
  •  Pressure control और liquid level regulators
  • Variable voltage AC से DC rectifiers
  •  Variable frequency DC से AC inverters
  • Variable frequency AC से AC converters या Cyclo converters
  •  HVDC, HVAC transmission और static VAR systems.
  •  Resistive welding और induction heating systems इत्यादि.

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