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Thyristor vs Thyratron vs Transistor Hindi me

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दोस्तों जैसे के आपने पहले पढ़ा की पहले के ज़माने में thyratron का इस्तेमाल होता था तो फिर ये thyristor क्यों ? इसके बीच में difference क्या है ?

Thyristor और Thyratron के बीच का difference:

Thyristor या SCR के invention से पहले, industrial control applications के लिए thyratrons का इस्तेमाल होता था. इस device का popular forms arc converters था जो की thyratrons का इस्तेमाल कर rectification और inversion के लिए उपयोग किया जाता था. Thyratron एक gas-filled tube है जिनमे तीन terminal होते हैं –anode. cathode और grid. Grid और cathode के बीच positive voltage के साथ thyratron switch ON हो जाता है. Thyristor या SCR और thyratron के कुछ difference नीचे दिए गए हैं:

Difference between Thyristor and Thyratron
  1. एक SCR या thyristor को एक main supply और एक control supply या signal की ज़रुरत होती है, वही thyratron को एक large supply voltage जो anode या cathode terminals के बीच में होता है और एक separate filament supply की ज़रुरत होती है. और कुछ thyratrons को auxiliary diodes के लिए additional power supply की भी ज़रुरत होती है.
  2.  Thyristors को wide range of frequencies के साथ operate किया जाता है और वही thyratrons एक limited 1 KHz की frequency range में operate करता है.क्युकि arc ionising और deionising times thyratron में relatively बड़ा होता है.
  3. SCR के internal losses thyratrons के मुकाबले बहुत कम होते हैं क्युकि anode से cathode का arc voltage drop thyratron में ज्यादा होता है जो की उपयोग हुए gas के molecular weight के inversely proportional होता है. 
  4. Thyratron के compare में thyristors का turn ON और turn OFF times कम होता है. Thyratron में इसलिए ज्यादा होता है क्युकि inter electrode region में gases present होते हैं.
  5. कोई भी unwanted flash-overs और arc-banks को avoid करने के लिए thyratron के anode और cathode के terminals के बीच sufficient spacing provide करनी पड़ती है (large anode और cathode voltage के कारण ). यह spacing thyristors से ज्यादा होती है. इसलिए thyratrons thyristors से bulkier होते हैं.(thyristors के पास reduced size और weight होता है.)
  6. Thyristor जो है वो thyratron से ज्यादा reliable होता है.
  7. Thyristor की जो life होती है ना वो ज्यादा होती है जबकि thyratron के पास छोटी life span होती है.
  8. Thyratron एक voltage controlled device है जबकि thyristors एक current controlled device है.

Difference Between Thyristor and Transistor

Difference Between Thyristor and Transistor

दोनों thyristor और transistor three terminal semiconductor switching device है. और बहुत सारी applications में उपयोग होती है क्युकि इसके पास smaller size, high efficiency और low cost का advantage है.

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हालाँकि transistor भी high voltage और current ratings  के साथ available है और उसे power transistors कहा जाता है, लेकिन इन दोनों devices के बीच में कुछ differences होते हैं जो नीचे लिखे हुए हैं.

  1. Thyristor एक 4 layer की device है जबकि transistor के पास 3 layers होते हैं.
  2. अगर एक बार gate को एक pulse के साथ trigger किया जाता है तो SCR या thyristor turn on ही रहते हैं ( इसे हम thyristor की regenerative  action कहते हैं) जब तक की किसी दुसरे technique से इसे off ना किया जाए. लेकिन transistor को conduction state में रहने के लिए continuous base current की ज़रुरत होती है.
  3. Thyristor को एक switching device की तरह ही सिर्फ उपयोग किया जाता है (या तो turn on या turn off) करने के लिए जबकि बहुत सारे application में transistor को active region में ही operate किया जाता है.
  4. Thyristors को किलो watts की range में rate किया जाता है. वही दूसरी तरफ transistor को several 100 watts की range में rate किया जाता है.
  5. Power transistors में internal losses thyristors से ज्यादा होती है. 
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