Resistor and their types | रेजिस्टेंस और उनके प्रकार

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Resistor ( रजिस्टर ) क्या है ?

RESISTOR के पहले हमे ये जानकारी लेना जरूरी है की resistance क्या है. प्रकृति में पाया जाने वाला हर पदार्थ जिससे current के flow को प्रतिरोध आता है या रुकावट उत्पन होती है उसे हम resistance कहते है. Resistor एक इलेक्ट्रिकल कॉम्पोनेन्ट है जो circuit में resistance उत्पन करता है. Resistance को ohm(Ω) से प्रदर्शित किया जाता है.

green motherboard
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किन किन चीजो पर depend करता है 

resistance मुक्य रूप से तीन सोत्र से निर्भर करता है .

१.चालक तार की लंबाई ( length )

२.चालक तार की मोटाई ( thickness)

३.चालक तार का तापमान ( Temperature )

Resistance को measure करने का सूत्र ( Farmula ) :

R=(ρ*l)/a

जहा l लम्बाई है तार की, a area है तार का .

ρ एक कांस्टेंट है जिसे resistivity कहा जाता है.

सभी resistor जो इस प्रकृति में पाए जाते है उनका अपना अपना resistance (प्रतिरोधतक) शक्ति होता है. प्रतिरोधी पदार्थो को उनके गुण और प्रतिरोधी शक्ति के हिसाब से विभन्न बिजली उपकरणों में विभन्न उपयोगो के लिए कम में लाते जाते है.

कैसे नापते हैं रेजिस्टेंस 

किसी भी circuit में resistance पता करने के लिए हम ohm’s law का प्रयोग किया जाता है. ohm’s law कहता है: V=IR,जहा V वोल्टेज जो circuit में दिया गया है, I current है और R resistance है.

R=V/I

Resistance वोल्टेज से directly proportional है और current से inversely proportional है . ये सूत्र डायरेक्ट करंट(DC) के लिए सीधे तरीके से इस्तेमाल होता है.

 

Resistors के टाइप्स 

Resistor के मुख्य दो प्रकार होते है:

circuit-circuit-board-resistor-computer-163100.jpeg
Fixed Resister in blue (center)

Fixed resistor- जिसका resistance फिक्स होता है.

Variable Resistor- जिसका Resistance बदलते रहता है – कभी कम तो कभी ज्यादा हो सकता है.

 

Fixed resistor के विभन्न प्रकार:

 

1. Carbon composition resistor :- इस Resistor मे carbon पाउडर और graphite को मिलाकर बनाया जाता है. और इस mixture को एक छड़ (Rod)  के रूप में बनाया जाता है और इसके दोनों तरफ धातुओं की दो टोपी (Cap) लगाई जाती है. रजिस्टर को सर्किट के साथ जोड़ने के लिए इसके दोनों छोर पर एक कंडक्टर वायर भी लगाइ जाति है.

2. Wire wound resistor : इन रजिस्टर में Insulating Core Or Rod के चारों तरफ एक Resistive ire लपेटी होती है . और यह वायर ज्यादातर Tungsten, Manganin, Nichrome या Nickel और Nickel Chromium Alloy की बनी होती है. और इन प्रतिरोधको की Insulating Core Or Rod चीनी मिट्टी के बरतन, बेकलेइट, प्रेस बांड पेपर या सिरेमिक मिट्टी सामग्री बनी होती है. यह प्रतिरोधक काफी महंगे होते हैं और इन्हें किसी खास सर्किट में ही इस्तेमाल किया जाता है जैसे कि .Wheatstone Bridge.

3. Thin film resistor :  सभी Thin Film प्रतिरोधक चीनी मिट्टी और प्रतिरोधी सामग्री द्वारा बनाए जाते हैं.और यह प्रतिरोधक भी आगे दो श्रेणियों में बांटा गया है.इस प्रतिरोधक में बढ़िया क्वालिटी की चीनी मिट्टी और हाथ से बनी Insulating Rod, Plate या Tube के चारों तरफ सुचालक सामग्री की एक Layer लगाई जाती है.

4. Fusible resistor :- यह प्रतिरोधक Wire Wound Resistor कि तरह ही होते हैं. जब किसी सर्किट की Power Rating एक Specified Value से ज्यादा बढ़ती है. तब यह प्रतिरोधक Fuse की तरह काम करता है. जैसे कि यह सर्किट को Breaks या Open कर देता है. इसीलिए इस प्रतिरोधक को Fusible Resistors कहा जाता है. Fusible Resistors एक समय पर दो काम करता है. यह करंट के बहाव को भी कम करता है और उसी समय एक फ्यूज की तरह भी काम करता है.

Variable resistor या परिवर्तनशील प्रतिरोधक वह प्रतिरोधक है जिसका प्रतिरोध  value बदला जा सकता है. ऐसे प्रतिरोधक का इसतेमाल रेडियो और टीवी के volume control में किया जाता है.

Variable resistor के विभन्न प्रकार:

 

  1. Potentiometer : Potentiometer एक ऐसा प्रतिरोधक है जो कि किसी भी सर्किट में वोल्टेज के लेवल को कंट्रोल करने का काम करता है. इस प्रतिरोधक का कुल Resistance बाहर वाले दोनो टर्मिनल के बीच का Resistance होता है. अब इसके रजिस्टेंस को कंट्रोल करने के लिए बीच वाला टर्मिनल (Wiper) इस्तेमाल में लिया जाता है जिसे कि दाएं या बाएं घुमाने पर इसका रेजिस्टेंस कम या ज्यादा होता है. ऐसे प्रतिरोधक आज भी पुराने टीवी और रेडियो में देखने को मिलता है.

2. Rheostat : Rheostats एक ऐसा प्रतिरोधक है जिसमें हमें दो या तीन टर्मिनल देखने को मिलते है और इसे करंट को कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल में लिया जाता है और करंट को कंट्रोल करने के लिए इसे हाथ से हमेशा  सेट करना पड़ता है. और इस प्रतिरोधक को Tapped Resistors और Variable Wire Wound Resistors के नाम से भी जाना जाता है. Rheostat की रेंज 1Ω से 150Ω तक होती है. इन प्रतिरोध को की पावर रेटिंग 3 से 200 Watts तक होती है लेकिन ज्यादातर 5 से 50 Watts तक की पावर रेटिंग वाले प्रतिरोधक ही इस्तेमाल किए जाते हैं.

3. Trimmers: प्रतिरोधक के अच्छे संचालन और Efficiency के लिए उसमें एक अतिरिक्त Screw लगा दिया जाता है जिसे Trimmers प्रतिरोधक के रूप में जाना जाता है. लेकिन इस प्रतिरोधक के रजिस्टेंस को बदलने के लिए आपको पेंचकस की जरूरत पड़ती है . स्क्रू ड्राइवर की मदद से इस प्रतिरोधक के Screw को घुमाने से इसका रजिस्टेंस बदल जाता है. यह प्रतिरोधक Carbon Composition, Carbon Film, Cermet और Wire Materials द्वारा बनाए जाते हैं. और मार्केट में आपको यह प्रतिरोधक 50 Ohms से लेकर 5 Mega Ohms तक की रेंज में मिल जाएंगे.

Resistor Connection:

किसी भी circuit में हम resistor को दो तरह से connect कर सकते है: एक series connection जिसे हम श्रेणी connection कहते है ,और दूसरा parallel connection जिसे हम समानांतर connection कहते है.

series connection :

Req= R1 + R2 + …………….. Rn

अगर आपने एक सर्किट में सभी रजिस्टर को क्रमबद्ध यानी की सीरीज में लगा दिया है. तो उनका रजिस्टेंस आपस में जोड़ने तो वह उन सभी प्रतिरोध को का कुल रजिस्टेंस मिल जाता है.

Parallel connection :

1/Req= 1/R1 + 1/R2 +………….+ 1/Rn

अगर आपने सभी प्रतिरोध को को समानांतर लगा दिया है तो इनका रजिस्टेंस निकालने के लिए आपको ऊपर दिया गया फार्मूला लगाना पड़ेगा.

 

COLOUR CODING of resistor:

रेजिस्टेंस का मान उसके ऊपर कलर के रूप में अंकित होता हैं।

रेजिस्टेंस के ऊपर मुख्यत: रंगों की चार,पाँच,या छ: रंगों की धारियां बनी होती हैं। इन्ही रंगों के मान के हिसाब से रेजिस्टेंस की वैल्यू निकलते है। रंगों की value नीचे दिए गए प्रणाली से निकला जाता है. इसमे 0 से 9 तक की संख्या के लिए कलर फिक्स्ड होते हैं जो की नीचे बताया गया हैं ।

 

resistance.png

 

Resistor की colour coding पता करने का आसान formula:

B B R OY G B V G W G S

BB ROY has a Great Beautiful V(W)ife in Green saree Wearing Gold and Silver necklace.

 

  1. रेजिस्टेंस के सिरे के सबसे नजदीकी धारी को पहला Band कहते है।
  2. पहली धारी में कभी भी काला ,गोल्डन या सिल्वर रंग नहीं आता हैं।
  3. गोल्डन या सिल्वर रंग हमेशा पहले दो रंग के बाद ही होते हैं ।
  4. किसी भी रेजिस्टेंस में कम से कम 3 और ज्यादा से ज्यादा 6 रंग होते हैं ।
  5. चार रंग की रेजिस्टेंस में पहले तीन रंग रेजिस्टेंस की मान जानने के लिए काम में आते हैं ।
  6. रेजिस्टेंस में पहले दो रंग की संख्या ज्यो की त्यों लिखी जाती हैं।
  7. रेजिस्टेंस में तीसरा रंग की जितने अंक का होता है उतने शून्य पहले दो रंगों के अंको के बाद लगते हैं ।
  8. इस तरह जो संख्या प्राप्त होती हैं। यही रेजिस्टेंस का मान (value)होती है। जिसे ओह्म (Ω )में मापा जाता हैं।
  9. यदि यह संख्या या से ज्यादा है। तो उसमे १००० का भाग देकर (mΩ ) बनाते हैं।
  10. यदि गोल्डन या सिल्वर कलर रेजिस्टेंस में अंतिम Band में हो तो वह रेजिस्टेंस का टॉलरेंस (tolerance)होता हैं

 

resistance color coding.png

 

Preeti

Preeti is pursuing her engineering under electronics engineering program. She always crave to learn the technology specially which touches the newfangled part. She has a bad habit of entering into the world of programming languages. She is still trying to be a developer and in her free time she is wordsmith to write her imaginations.

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