पॉवर एम्पलीफायर टाइप्स, वर्किंग और एप्लीकेशन

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दोस्तों आप सभी को amplifier के बारे में तो पता होगा, अगर नहीं पता आप हमारा amplifier पर लिखा हुआ article पढ़ सकते हैं। Amplifier  की family  का एक सदस्य है power amplifier जिसके बारे में आज हम पढ़ने जा रहे हैं। तो सबसे पहले जानते है  power amplifier क्या है ?

Power amplifier क्या है ?

Power amplifier  एक इलेक्ट्रॉनिक amplifier है जो दिए गए input signal के power के magnitude को increase करने के लिए design किया जाता है। Input signal के पावर को एक high level पर increase किया जाता है ताकि वह output devices जैसे speakers, headphones, RF transmitters इत्यादि के load को drive कर सके. Power amplifier loads को directly drive करने के लिए design किया जाता है और यह amplifier में final block की तरह उपयोग है ।  

Power amplifier के Input signal को एक certain threshold के ऊपर होना चाहिए। इसलिए raw audio /RF signal को power amplifier  directly दिए जाने की  बजाय, उसे पहले current /voltage amplifier का इस्तेमाल कर पहले pre -amplifie किया जाता है और कुछ बदलाव करने बाद  power amplifier को input की तरह भेजा जाता है। आप नीचे  audio amplifier का ब्लॉक diagram देख सकते हैं।

Power amplifier Hindi me

इस case में माइक्रोफोन को input source की तरह उपयोग किया जाता है। माइक्रोफोन के  signal का magnitude power amplifier के लिए कम  है। इसलिए सबसे पहले इसे pre -amplify किया जाता है जहाँ voltage  current को थोड़ा increase किया।  उसके बाद signal को tone और volume controls सर्किट के द्वारा pass कराया जाता है। और सबसे अंत में signal power amplifier को दिया जाता है और उसके output को स्पीकर में दिया जाता है। 

Power Amplifiers के types

जो output device connected है उसके type के अनुसार power amplifier को तीन प्रकार में रखा जाता है।

Audio Power Amplifiers

इस प्रकार का power amplifier का उपयोग कमज़ोर audio signal के power magnitude को बढ़ाने के लिए उपयोग होता है. ये amplifiers का उपयोग televisions, mobile phones के स्पीकर ड्राइविंग circuitries में होता है। ऑडियो power amplifier की output range कुछ miliwatts (headphone amplifier जैसे) से हज़ारों watts ( Hi-Fi/Home theatre systems के amplifiers में ) तक होती है।

Radio Frequency Power Amplifiers

Wireless transmission को modulated waves की ज़रुरत होती है जो की लम्बे distance तक हवा के द्वारा भेजा जा सके। ये signals को antennas का उपयोग कर transmit किया जाता है और जो signals antenna को भेजा जाता है उसके power  magnitude पर range depend करता है। FM broadcasting जैसे wireless transmission के लिए, antennas को input signal thousands kilowatt में power चाहिए। यहाँ रेडियो frequency power amplifiers modulated waves के power के magnitude को increase करने में मदद  ताकि वो distance तक पहुँच सके। 

DC Power Amplifiers

DC power amplifier का उपयोग PWM (Pulse width modulated) के power को amplify करने के लिए होता है । ये electronic कण्ट्रोल systems होता  मोटर्स actuators drive करने के लिए high power signals की ज़रुरत होती है . ये microcontrollers से input लेती है और power बढ़ा कर DC मोटर्स या actuators amplified signals है . 

Power Amplifier Classes

Power amplifier सर्किट को कई तरह से design किया जाता है . प्रत्येक सर्किट configuration का ऑपरेशन और output characteristics एक दूसरे से अलग होता है। अलग अलग power amplifier सर्किट्स के characteristics और behavior को differentiate करने के लिए , Power amplifier classes का इस्तेमाल होता है. जिसमे letters (अक्षर ) symbols की तरह उपयोग होता है ताकि हम ऑपरेशन के method का पता लगा सके।

ये mainly दो category में classify होते हैं। Power amplifier जो analog signal को amplify करते हैं वो A, B, AB या C category के अंदर आते हैं. Power amplifiers जो Pulse Width Modulated (PWM) digital signals को amplify करते हैं वो D, E, F इत्यादि classes में आते हैं.

ज़्यादातर power amplifiers ऑडियो amplifiers सर्किट्समें इस्तेमाल होते हैं और वो classes A, B, AB या C में आते हैं . चलिए अब एक-एक कर सब पढ़ते हैं .

Class A Power Amplifier

Analog waveforms पॉजिटिव highs और नेगेटिव lows  बना होता है. इस class के amplifier में पूरा input waveform amplification process के लिए उपयोग होता है. एक single transistor waveform के दोनों पॉजिटिव और नेगेटिव halves को amplify करने के लिए उपयोग होता है . यही theory class A amplifier के डिज़ाइन को सरल बनाता है और ये power amplifiers सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला amplifiers हैं . हालाँकि इस class के  amplifier को बेहतर डिज़ाइन ने supersede (पीछे छोड़ना) कर लिया है परन्तु ये अभी भी पॉपुलर है.

Class A Power Amplifier
Class A Power Amplifier

इस class के amplifier में active element (इलेक्ट्रॉनिक component जो amplify करने के लिए उपयोग होता है जो यहाँ इस case में transistor है ) का प्रयोग होता है, यहाँ तक की जब कोई input signal नहीं होता है तभी. इसके कारण बहुत heat generate होता है efficiency भी normal configuration में 25% तक reduce होती  है और transformer coupled configuration में 50% तक reduce होती है.

Conduction angle (360° में से waveform का वो part जो amplification के लिए उपयोग होता है ) class A amplifier का 360°. इसलिए  signal distortion कम होता है और  high frequency performance बेहतर होता है.

Class B Power Amplifier

Class B power amplifiers  efficiency और heating problems को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. Single transistor के बदले ये amplifiers पूरे waveform को amplify करने के लिए दो complementary transistors का उपयोग करते हैं. एक transistor waveform के पॉजिटिव half को amplify करता है और दूसरा नेगेटिव half को amplify करता है. इसलिए प्रत्येक active device waveform का one half conduct करता है और दोनों मिलकर साथ में पूरा signal amplify कर देते हैं.

Class B Power Amplifier

Class B amplifiers की efficiency दो transistor डिज़ाइन के कारण class A amplifiers से ज़्यादा होती है. Theoretically यह कहा जाता है की efficiency 75% तक achieve हो सकती है. इस class के power amplifier का उपयोग FM radios और transistor radios के battery को operate करने में उपयोग होता है.

Waveform के दो halves के superposition के कारण, crossover region में बहुत कम distortion होता है. Signal distortion को कम करने के लिए, class AB amplifiers का डिज़ाइन कराया गया .

Class AB Power Amplifier

Class AB amplifiers class A और class B amplifiers के combination से बने होते हैं. ये class के amplifiers का डिज़ाइन class A के efficiency problem को कम करने के लिए और class B amplifiers के distortion problem को खत्म करने के लिए हुआ था.

Class AB Power Amplifier

यह class A amplifier की तरह high frequency response maintain रखता है और इसकी efficiency भी class B amplifiers की तरह अच्छी है. Diodes और resistors का combination दिया जाता है ताकि थोड़ा bias voltage दिया जा सके जिससे crossover region में waveform की distortion कम हो सके. और इसकी वजह से efficiency(60%) थोड़ा ड्राप आता है.

Class C Power Amplifier

Class C power amplifiers का design बहुत ज़्यादा efficiency देता है परन्तु  linearity/conduction angle को घटा कर 90° के अंदर कर देता है. दूसरे शब्दों में कहे तो  ये efficiency को बढ़ाने के लिए amplification की quality की बलि दे देता है. Conduction  angle अगर कम  होता है तो इसका मतलब distortion ज़्यादा होता है और इसलिए इस class के amplifier को audio amplification suit  नहीं करता।  ये high frequency oscillators और Radio Frequency signals के amplification में उपयोग होता है।

Class C amplifiers में tuned load होता है जो input signal को फ़िल्टर और एक certain frequency पर amplify करता है और इसलिए बाकि frequency पर ये waveforms suppress हो जाते हैं।

Class C Power Amplifier

इस type के power amplifier में active element तभी conduct करता है जब input voltage एक certain threshold से ज्यादा होता है। इसके कारण power dissipation कम हो जाता है और efficiency बढ़ जाती है।

Power Amplifier Classes (D , E ,F ,G इत्यादि ):

Power amplifier classes D, E, F, G इत्यादि का उपयोग PWM modulated digital signals को amplify करने में होता है . ये सभी amplifiers switching power amplifiers की category में आते हैं जो या तो output को constantly ON या constantly OFF रखता है . इसके बीच में कोई और level नहीं होता .

अपनी इस सरलता के लिए, ये power amplifiers की classes theoretically efficiencies 90-100% तक पहुँच जाती है.

Applications

Power amplifiers  के कुछ applications  नीचे लिखे गए हैं :

  • Consumer Electronics: ऑडियो power amplifiers का उपयोग लगभग हर consumer electronic devices में होता है जैसे microwave ovens, headphone drivers, televisions, mobile phones, Home theatre systems, theatrical और  concert reinforcement systems .
  • Industrial: Switching type power amplifiers का उपयोग ज़्यादातर industrial actuator systems जैसे  servos और  DC motors को कंट्रोल होता है।
  • Wireless Communication: High power amplifiers का इस field में बहुत important role होता है। वह cellular या  FM broadcasting signals को users तक transmit करने में मदद करते हैं . Satellite communication equipment में भी important role निभाता है।

उम्मीद है आपको यह article पसंद आया होगा और power amplifier के बारे में जानकारी मिल गयी होगी. इसी तरह आप हमारे articles पढ़ते रहिए । और हाँ, आपके पास भी है कोई जबरदस्त टेक्नोलॉजी से रिलेटेड मसाला और आपको है लिखने में जरा सा भी इंटरेस्ट तो आप हमे अपने आर्टिकल्स aryan.yudi@gmail.com पर भेज सकते हैं. हम पब्लिश करेंगे अपनी वेबसाइट पर.

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Preeti is pursuing her engineering under electronics engineering program. She always crave to learn the technology specially which touches the newfangled part. She has a bad habit of entering into the world of programming languages. She is still trying to be a developer and in her free time she is wordsmith to write her imaginations.

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