New Internet kya hai ? Kaise badlega future ?

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अरे भाई.. पर क्यूँ ???

अगर आप टेक्नोलॉजी में जरा सा भी इंटरस्ट रखते हैं तो वहां Tim Berners-Lee का नाम तो जानते ही होंगे. नहीं? कोई ना … हम बता देते हैं.  टिम बर्नर्स को फादर ऑफ इंटरनेट कहा जाता है. वर्ल्ड वाइड वेब के जन्मदाता वही है. और आज जो भी वेबसाइट हम अपने मोबाइल और लैपटॉप पर सब कर पाते हैं वह सब टिम बर्नर्स की ही देन है. लेकिन टिम बर्नर्स इस बात से काफी आहत हैं कि जिस तरह के इंटरनेट की परिकल्पना उन्होंने की थी वह ऐसा नहीं है इसके लिए टीम बर्नर्स अपने एक प्रोजेक्ट पर है आई देखते हैं क्या है वह प्रोजेक्ट?

Sir Tim Berners Lee arriving at the Guildhall to receive the Honorary Freedom of the City of London

क्या करेंगे अब Tim Berners-Lee ??

काफी समय से Tim Berners-Lee यह बताते रहे हैं कि इंटरनेट फ्री तरीके से काम करना चाहिए. और यहां पर किसी भी तरह का restriction नहीं होना चाहिए. लेकिन जिस तरह से आज बड़ी बड़ी टेक कम्पनीज जैसे कि गूगल, फेसबुक, अमेज़न ने इंटरनेट पर कब्जा कर रखा है और किस तरह हम लोगों का डाटा हम लोगों से लेकर उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं ऐसे इंटरनेट की परिकल्पना टीम ने नहीं की थी. इसलिए Tim Berners-Lee ने इस इंटरनेट के खिलाफ एक स्टार्टअप के रूप में जंग छेड़ दी है और उस स्टार्टअप का नाम दिया है Inrupt. 

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क्या है Tim Berners-Lee का project? 

इस स्टार्टअप पर Tim Berners-Lee पिछले 9 महीने से चुपके से काम कर रहे थे. हालांकि वह एमआईटी जैसी धाकड़ यूनिवर्सिटी में टीचिंग की इम्पोर्टेन्ट पोजिशन पर है लेकिन फिर भी उन्होंने वहां से छुट्टी लेकर इस स्टार्टअप पर चुपके से काम किया. और अब Inrupt अपने अंतिम स्वरूप में आ गया है तो वर्ल्ड के सामने Tim Berners-Lee अगले हफ्ते इसे लॉन्च करने वाले हैं. जिस प्लेटफार्म पर Inrupt बना हुआ है उस प्लेटफार्म का नाम है सॉलिड (Solid). इस प्लेटफार्म पर एमआईटी के अन्य प्रोफेसर्स Tim Berners-Lee के साथ कई सालों से काम कर रहे थे. सॉलि़ड इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इंटरनेट पर पूरी फ्रीडम रहे और एक्सेस करते हुए आपका कोई भी डाटा चोरी ना हो पाए.

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Demo of Project Inrupt

Tim Berners-Lee ने दिखाया एक बहुत सिंपल सा ब्राउजर पेज जिस पर पर्सनल यूज की सारे एप्स जैसे कि कैलेंडर, chats, म्यूजिक सब के सब एक ही पेज पर उपलब्ध है. जैसे कि आप व्हाट्सएप स्पॉटिफाई गूगल ड्राइव सभी को combine करके क्लाउड स्टोरेज के थ्रू और ऑनलाइन कनेक्टिविटी के थ्रू एक ही पेज पर ले आए. बस अंतर इतना रहेगा कि यह सारी चीजें आप कंट्रोल कर सकते हैं.

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तो फिर क्या अलग है इस नए इंटरनेट में?

इस इंटरनेट में नया यह है कि यह बिलकुल पुराने इंटरनेट जैसा होगा. मतलब, एकदम पुराने इन्टरनेट जैसा. एकदम फ्री…. पूरी आज़ादी.  इसमें आप की एक आईडी होगी जिससे सॉलि़ड आईडी कहा गया है और आपके सारे डेटा को pod कहा गया है यानी कि पर्सनल डाटा स्टोर. इसका मतलब यह है की जिस तरह गूगल आपका सारा डाटा गूगल ड्राइव पर स्टोर करता है और माइक्रोसॉफ्ट वनड्राइव पर डाटा स्टोर करता है.

पर यह सारा का सारा डाटा गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के पास रहता है. और इन सर्वर की एक्सेस गूगल और फेसबुक को आसानी से है और वह आपका डाटा जब चाहे जैसे चाहे बिना आप की परमिशन के इस्तेमाल कर सकते हैं. परंतु सॉलि़ड आईडी में ऐसा नहीं होगा सॉलि़ड में आपका डाटा यानी कि p.o.d. आपकी आईडी में ही सेव रहेगा. जिसे कोई भी आपके अलावा एक्सेस नहीं कर पाएगा. जब भी कोई ऐप आपका डाटा एक्सेस करना चाहेगा तो वह पहले ऑथेंटिकेशन के लिए आपसे पूछा जायेगा.  अगर आप authenticate करेंगे तभी आपका डाटा किसी और app को एक्सेस होगा.

 

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गूगल, amazon और facebook जैसी कंपनीज को क्या नुक्सान?

इस तरह गूगल और फेसबुक की मोनोपोली फ्यूचर में खत्म हो जाएगी. Tim Berners-Lee का प्लान इस प्लेटफार्म से बहुत जबरदस्त पैसा बनाने का नहीं है. यह एकदम ओपन सोर्स रहेगा और Tim दुनिया भर के विभिन्न देशों में घूम घूम कर इसके बारे में अवगत कराएंगे. और डेवलपर्स को बताएंगे कि किस तरह Inrupt की सहायता से इस तरह के ऐप बनाया जाए जो डीसेंट्रलाइज होते  हैं.  यह बात क्लियर है की टीम का यह स्टेप गूगल और फेसबुक को काफी परेशान करने वाला है लेकिन देखा जाए तो यही फ्रीडम एक्चुअल में फ्रीडम है.


 

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