हॉल इफ़ेक्ट क्या है | What is Hall Effect?


दोस्तों आप सभी का इलेक्ट्रॉनिक्स के column में स्वागत है. आज हम एक ऐसे effect के बारे में पढेंगे जिसका material science और physics में कई बार उपयोग किया जाता है. जी हाँ आज हम hall effect के बारे में बात करेंगे. आप सभी के अपने school के physics के book में इसका ज़िक्र किया गया होगा.

तो चलिए जल्दी से शुरू करते हैं.

Hall Effect क्या है :

इस effect को Edwin Hall ने discover किया गया था. यह Fleming’s right hand rule के similar होता है. जब कोई current carrying conductor I transverse magnetic field B में रखा जाता है तो electric field E conductor में induce होता है जो की I और B दोनों के perpendicular होता है. इस phenomenon को hall effect कहते है. ये effect voltage difference के बारे में है जो की electrical conductor के across produce होता है और ये conductor में electric current से transverse होता है. यही नहीं इससे हम magnetic field के बारे में जान सकते हैं जो की current के perpendicular होता है.

Hall effect

Explanation:

जब current carrying conductor को transverse magnetic field में रखा जाता है तो magnetic field electrons पर pressure बनाते है जिसके कारण electrons curved path में journey continue करते हैं. नीचे दिए गए conductor में energy applied किया गया है. Magnetic field भी नीचे indicated है.

Hall Effect, conductor charge distribution
Hall Effect, conductor charge distribution

जैसे electrons conductor के through travel करता है जो की magnetic field B में lie करता है उसे magnetic force भी experience होता है.यह magnetic force electrons को एक side से दूसरे  side तक travel करने के लिए मजबूर करती है जिसके कारण एक side पर negative charge और दूसरे  side पर positive charge collect होते हैं.

ये charge का separation voltage difference create करता है जिसे हम hall voltage या hall EMF कहते हैं. Voltage तब तक build up होता है जब तक electric field  charge पर electric force produce करता रहता है जो की magnetic force के equal और opposite होता है. इस effect को hall effect कहते हैं.

नीचे दिए हुए hall effect के set up से हम hall effect को समझते है.

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मान लीजिये की आपके पास एक rectangular bar है जिसकी thickness t, length L, और width W है. और इस sample में magnetic field के presence में current I flow हो रहा है और यहाँ magnetic field current के direction से perpendicular यानी thickness के direction में apply किया जाता है.

Hall effect expression :

  • इस situation के under, magnetic field moving charge carriers के उपर transverse force exerts करता है जिसके कारण सभी carriers sample के एक side में collect हो जाता है.
  • Sample के sides में charges build up होने के कारण magnetic field को वो balance कर लेता है और उसका result यह होता है की conductor के दोनों sides के बीच में measurable voltage difference create होता है.

  • एक साधारण से metal के लिए, जहाँ सिर्फ एक ही type के charge carrier present है वहाँ Hall voltage VHको compute करने के लिए net Lorentz force को zero set करना पड़ता है.

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Charge carriers और उसके type के determination के लिए hall coefficient बहुत useful है. Hall coefficient को हम  induced electric field और current density और applied magnetic field के ratio में define करते हैं. उपर के equation के हिसाब से hall coefficient है:

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RH  का unit m3/C में express किया जाता है. इससे conclude होता है की charge carrier का type और उसकी density को हम hall coefficient RH के sign और value से estimate करते हैं.  और ये हम किसी भी magnetic field B जो की given है उसपर VH का variation I के function में study कर सकते हैं.

उपर के equation से हम conclude कर सकते हैं की Hall effect ये differentiate करता है की positive charges एक direction में move हो रहा है और दूसरा direction में negative charges move हो रहा है.

Hall effect magnetic field को measure करने में बहुत useful होता है नीचे दिए हुए figure से हम इसके बारे में जानेगे.

Hall effect

Figure: Magnetic field के measuring में Hall effect का application

अधिकतर magnetometers जैसे vibrating sample magnetometer, solid magnetometer hall effect का इस्तेमाल कर Tesla के order में large magnetic fields के measurement के लिए किया जाता है.

उपर के figure में एक thin film hall probe है जो की magnetic field में रखा गया है और transverse voltage(microvolts के order में)measure किया जाता है.

मान लीजिये की एक hall probe है जिसकी thickness 2 μm है,1 ampere का applied current है और magnetic field 2 Tesla है(n = 8.47e28 electrons/m3 ) ये hall voltage produce करता है:

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Hall probe applications:

हाल में ही, hall effect का इस्तेमाल portable electronics में किया गया था.

Open/Close detection: Laptops, mobile phones, और दूसरी portable devices के साथ एक rotating hinge और clam-shell design (नीचे figure में देखे) होता है जो की पहले के ज़माने में mechanical switches की तरह काम करता था ताकि वो open या closed position indicate कर सके. Device का status जानना बहुत ज़रूरी है की वो open या close है ताकि sleeping circuitry को power apply कर सके और जब device को sleep mode से return करने के लिए भी power apply कर सके और power conserve हो सके.

Hall effect application
Hall effect application

अभी के cell phones में, digital cameras और दूसरी portable instruments में एक hall effect integrated chip(IC) switch और magnet combination का इस्तेमाल होता है. यह IC ज्यादातर unipolar effect IC होती है जो की तभी operate होती है जब magnetic field sufficient strength की होती है और polarity detect होता है.

ठीक उसी तरह, omnipolar hall effect IC switches किसी भी polarity के magnetic field को detect करने में capable होते हैं और उनका भी इस purpose के लिए इस्तेमाल हो सकता है.Unipolar devices को operate करने के लिए कम power की ज़रुरत होती है पर magnet को properly oriented होना चाहिए, जबकि omnipolar devices बिना magnet orientat के operate होते हैं.

Planar hall effect sensor:

Planar hall’s sensor ferromagnetic materials के planar hall effect पर based है. यह anisotropic magnetoresistance में जो भी change होता है उसे measure करता है. यह change hall geometry में external magnetic field के कारण generate होता है. नीचे दिए हुए figure में देखे.

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Sensor plane में magnetic field components को sensor तो करता है पर वो ordinary hall sensor के oppose में होता है. इसका मतलब यह हुआ की वो field components को sensor plane के perpendicular measure करता है.

अगर हम proper fabrication process को utilize करते हैं तो magnetization zero applied field में एक certain direction में confined हो जाता है. और perpendicular field का application magnetization state को change करता है और वो भी कुछ इस तरह से की electronic readout applied field के respect में linear होता है. यह condition तभी true होती है जब applied field intrinsic effective anisotropy field के ¼ से भी कम होता है.

Planar hall’s sensor जो दिखाया गया है वो magnetic bead detector की तरह है जो की earth की field को nanotesla की precision के साथ measure कर रहा है. यही नहीं planar hall sensor magnetic bioassay sensing में sensing principle की तरह इस्तेमाल होता है.

उम्मीद है आप सभी को hall effect और उसके application के बारे में पता चल गया होगा. इसी तरह हमारे blog को follow करते रहे.


Preeti

Preeti is pursuing her engineering under electronics engineering program. She always crave to learn the technology specially which touches the newfangled part. She has a bad habit of entering into the world of programming languages. She is still trying to be a developer and in her free time she is wordsmith to write her imaginations.

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