गूगल ग्लास क्या है? कैसे काम करता है

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नमस्ते दोस्तों. आपके technical दुनिया में आपका स्वागत है. आज हम एक चश्मे के बारे में जानेंगे. अरे, ये कोई ऐसा वैसा चश्मा नहीं है, मैं Google Glass के बारे में बात कर रह हूँ. मैं एक और बात clear कर देना चाहता हूँ की Google Glass और Google Goggles अलग हैं. कई बार लोगों को इन दोनों में confusion हो जाता है. पर Google Goggles एक app है, जिसके बारे में किसी दिन और बाते करेंगे. यहाँ आप जानेंगे कि  Google Glass क्या है? कैसे काम करता है? उसके specifications क्या है? उसके uses क्या है? वो क्यूँ criticise किया गया?

तो चलिए जानते हैं Google Glass के बारे में जिसे हम सिर्फ Glass भी कह सकते हैं.


क्या है Google Glass?

Google Glass या Glass एक brand है smart glasses का. यह एक optical head-mounted display है जो की एक चश्मे के आकार में design किया गया है. यह X company (Google X) द्वारा develop किया गया जो कि ubiquitous computer के mission को बढ़ावा दे रही है. (ubiquitous computer का मतलब कहीं भी और कभी भी computing करना). यह Glass एक smartphone की तरह काम करता है जहाँ हम internet के द्वारा अपने साधारण मानविक भाषा से काम कर सकते हैं.

Google glass prototype in 2012 at Google’s I/O

Glass Introduction:

  • Developer: Google
  • Manufacturer: Foxconn
  • Release Date: 2013
  • Operating System: Optical Head-Mounted Display (OHMD), Peripheral Head-Mounted Display (PHMD), Wearable technology
  • CPU: OMAP 4430 system, Dual-core Processor
  • Memory: 2 GB RAM
  • Storage: 16 GB flash memory total (12 GB usable memory)
  • Display: Prism projector, 640×360 pixels
  • Sound: Bone conduction transducer
  • Input: Voice command, accelerometer, gyroscope, magnetometer, ambient light sensor, proximity sensor
  • Controller Input: Touchpad, My Glass phone mobile app
  • Camera: 5 Megapixel photos, 720p video
  • Connectivity: Wi-Fi, Bluetooth, Micro USB
  • Power: 570 mAh internal lithium-ion battery
Google glass

कैसे काम करता है Google Glass?

इसके काम करने का process हम अलग-अलग हिस्सों में समझेंगे.

Display

हम सब के दिमाग में आएगा की जो display होता है वो एक स्क्रीन पर होगा. पर उसके कई नुकसान हैं, पहला तो ये की glass की कांच (display) बहुत छोटी है. दूसरी बात ये की इतने पास से हम किसी भी चीज़ पर फोकस नही कर सकते हैं क्यूंकि human eye का near point 25 cm होती  है.

Google glass display, source: Martin Missfeldt

तो यह glass image को हमारे retina (नेत्रपटल) पर beam के माध्यम से project करता है. इस glass में एक छोटा सा projector है जो की image प्रोजेक्ट करता है. वह image एक semi-transparent prism से reflect होकर हमारे आँखों में जाता है. इसका angle आँखों के focus के हिसाब से हम change कर सकते हैं.

Audio

अब आप लोग बहुत ध्यान से पढना क्यूंकि हम थोडा सा biology में घुसने वाले हैं. इधर developers ने थोडा human से जुड़ा हुआ काम किया है. जैसे हम जब बात करते हैं तो हमारे गले से vibrations निकलते हैं और उसे हम सुनते हैं वैसे ही यहाँ भी vibrations निकलते हैं. यहाँ vibrations हमारे कान की हड्डियों में से जाते हैं. जब हम नार्मल sound सुनते हैं तो वो हमारे auditory canal से ear drum को vibrate करता है. उस vibrations को 3 छोटी हड्डियाँ (ossicles) cochlea तक पहुंचाती हैं. उसमे छोटे छोटे stereovilli होते हैं जो की बाल जैसे लगते हैं. ये उन vibrations को electical impulse में convert कर देता है जो आगे auditory nerve से दिमाग में जाता है.

Google glass audio, Source: How stuff works

पर इस glass में जो vibrations आते हैं वो सीधा cochlea तक पहुँच जाता है. और आगे बढ़ते हैं. Audio और कान के बारे में कितना कुछ जान लिया आज. है ना?

Touchpad:

इस glass में कैमरा के पीछे एक topuchpad है जिससे हम इसे control कर सकते हैं. उसमे सारे options हैं जेसे की sharing, deleting, swiping, voice call आदि.


Uses

इस glass को हम hospital और surgery में भी use कर सकते हैं. ये Autism में भी helpfull है. ये Journalism, pubic events में भी use होता है.

Criticism

इतने facilities होने के बावजूत इससे बहुत criticise किया गया. क्यूंकि इसमें कुछ खामियां थी.

Privacy:

Google Glass पर privacy rights तोड़ने पर और security problems पर वाद विवाद हुआ था. उस glass का use करके हम अनजान लोगों को पहचान सकते हैं, कैसे? क्यूंकि ये सामने वाले का photo लेकर उसे इन्टरनेट पर सर्च करके उसके बारे में सोशल मीडिया से बहुत कुछ जान सकते थे. है न interesting और साथ में खतरनाक भी? पर ये right फिलहाल सिर्फ पुलिस के पास है. इस glass से हम किसी की भी photo ले सकते हैं बिना उसको पता चले पर यह बिलकुल भी सही बात नही है और प्राइवेसी का violation भी है. Cyber forensics experts का यह कहना है की glass की मदद से कोई भी किसी के smartphone का password भी track कर सकते हैं. इन privacy problems की वजह से यह बहुत controversial बन गया था.

Safety:

कई बार इससे पहेनकर drive करते वक्त accidents हुए थे. इसीलिए इसे UK से ban कर दिया गया था.

इन वजहों से Google Glass prototype बनना बंद हो गया और 2017 और 2019 में दो नए Enterprise Edition निकले. भारत में Google Glass 80,000 INR में मिलता है. ये कई middle class लोगों के एक महीने की कमाई या कहे कि उससे भी ज्यादा के बराबर है.


इससे हम एक साथी कह सकते हैं पर इसमें भी कुछ कमियां छिपी हैं. लगता है आज हमने Google Glass के बारे में काफी कुछ जान लिया है. अब मिलते हैं अगले Article के साथ. कमेंट section में बताइए की आपको यह कितना लाभदायक था और हम और क्या परिवर्तन ला सकते हैं इसके सुधार के लिए.

और हाँ, आपके पास भी है कोई जबरदस्त टेक्नोलॉजी और आपको है लिखने में जरा सा भी इंटरेस्ट तो आप हमे अपने आर्टिकल्स aryan.yudi@gmail.com पर भेज सकते हैं. हम पब्लिश करेंगे अपनी वेबसाइट पर.

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