Facial Recognition Technology क्या है? कैसे काम करती है?

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पहले के फ़ोन में जब लोग सिक्यूरिटी के लिए lock लगते थे तो बड़ा cool लगता था. उसके बाद जब स्मार्ट phones आये तो पैटर्न lock आया और बाद में फिंगर प्रिंट स्कैनर.  लेकिन यहाँ पर भी techlogoy नहीं रुकी और अब आ गया फेस रिकग्निशन technology. मतलब एकदम मैजिकल, जस्ट लुक अट योर फ़ोन एंड खुल जा सिम सिम. तो क्या है ये technology? कैसे काम करती हैं और क्या इसके एप्लीकेशन हैं, जानते हैं इस रोचक आर्टिकल में.

Facial Recognize Technologyक्या है?

फेशियल रिकॉग्नाइज टेक्नोलॉजी बायोमेट्रिक टेक्नोलॉजी का ही हिस्सा है जो किसी व्यक्ति को उसके चेहरे से उसकी पहचान करने का एक टूल है। इसे बायोमेट्रिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस एप्लीकेशन के रूप में भी जाना जाता है  जिसका यूज़ किसी व्यक्ति को  उसके आँख के रेटिना ,नाक ,चेहरे के आकार के आधार पर पहचाना जाता है। किसी फोटो, वीडियो या रियल टाइम में लोगों की पहचान करने के लिए फेस रिकॉग्नाइज सिस्टम का उपयोग किया जाता है ,लेकिन रिकॉग्नाइज डाटा में का Error का खतरा हो सकता है जो पुलिस वेरिफिकेशन के समय लोगों को उन क्राइम के लिए भी फंसा सकता है जो क्राइम उन्होंने कभी किया ही नहीं।   

Facial Recognition Technology in Hindi

अब देखते हैं कि विभिन्न स्मार्ट फोन में फेस अनलॉक इन टेक्नोलॉजी का किस प्रकार उपयोग किया जाता है और यह कैसे काम करती है?

Application ऑफ़ फेसिअल रिकग्निशन technology

  1. Android Basic Facial Technology: – आप जानते हैं एंड्राइड अपने आइसक्रीम और सैंडविच वर्ज़न के बाद से फोन को फेस अनलॉक करने में सक्षम है उस समय इस टेक्नोलॉजी का उपयोग सभी लोग  पिन और पासवर्ड के साथ एक अन्य ऑप्शन में भी करते थे। हालांकि लेकिन पहले यह टेक्नोलॉजी सिर्फ 2D इमेज को ही कैप्चर कर पाती थी जिससे कि हैकर या चोर के लिए सिस्टम को बेवकूफ़ बनाना बहुत आसान था और वह आपके फोन को आसानी से अनलॉक कर देता था।
फेसिअल रिकग्निशन technology in phones
  1. Samsung Iris Recognize Technology:- सैमसंग डिवाइस में Iris स्कैनर आपकी आंखों के रेटिना में पहचान का काम करती है जिस प्रकार  इंसान की उंगलियों के निशान अलग-अलग होते हैं ठीक उसी प्रकार हर इंसान की आंख  की रेटिना  भी अलग अलग होती है और इसे कोई कॉपी भी नहीं कर सकता  है। सैमसंग ने इस Iris टेक्नोलॉजी को सबसे  पहले अपने Flagship स्मार्टफोन में यूज़ किया था। क्योंकि पहले एक नॉर्मल फ्रंट फेसिंग कैमरा आंख के रेटिना कोई स्कैन नहीं कर सकता था इसलिए सैमसंग ने अपने  फ्लैगशिप स्मार्टफोन में स्पेशल इंफ्रारेड नैरो फोकस कैमरा दिया जिससे यह आंख के रेटिना को आसानी से स्कैन कर सकता था। लेकिन अल्टीमेटली सैमसंग की यह आइरिश टेक्नोलॉजी ज्यादा सुरक्षित नहीं है इसलिए आप कोई भी सेंसिटिव पेमेंट करते समय वेरिफिकेशन के लिए हमेशा फिंगरप्रिंट स्केनर का उपयोग करें। 
  2. Apple Face ID: – फेस आईडी आईफोन (X, XS, Xs MAX etc.)  और आईपैड(3rd & 4th Gen.) के लिए एप्पल द्वारा डिजाइन और विकसित एक फेशियल रिकॉग्नाइज सिस्टम है।लेकिन नवंबर 2017 में आईफोन एक्स के साथ  पहली बार  3D फेशियल रिकॉग्नाइज टेक्नोलॉजी का यूज़ किया गया, तब से हर नए  आईफोन मॉडल और सभी आईपैड प्रो में इस 3D फेशियल टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाने लगा। आप जानते होंगे कि पहले एप्पल का आईफोन में टच आईडी सिक्योरिटी का यूज़ होता था लेकिन फेस आईडी ने फेस ऑथेंटिकेशन की सिक्योरिटी में क्रांति ला दी .

फेसिअल रिकग्निशन technology कैसे काम करती है

चेहरे पहचानने में आप अच्छे हो सकते हैं। आप किसी भी परिवार के सदस्य के चहरे को आसानी से पहचान सकते हैं क्योंकि आप मन के चेहरे से परिचित हैं जैसे कि उनकी नाक, आंख, चेहरा आदि। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चेहरे की पहचान तकनीक चेहरे को कैसे पहचानती होगी? फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी एल्गोरिदम स्केल पर काम करती है, जहाँ आप चेहरा देखते हैं पहचानते हैं, लेकिन टेक्नोलॉजीज फेस डेटा देखते हैं। उस डेटा को स्टोर और एक्सेस किया जा सकता है।

Steps ऑफ़ फेसिअल रिकग्निशन

  1. फेस डिटेक्शन: – सबसे पहले आपके चेहरे की तस्वीर को किसी फोटो या वीडियो से कैप्चर किया जाता है लेकिन इस तस्वीर में आपका चेहरा अकेला दिखाई देना चहिये, और आपका चेहरा एक दम सीधा होना चहिये, ताकि जिससे यह आपके फेस को सही तरह से स्कैन कर पाए.
  2. फेस Analysis: -अब चेहरे की तस्वीर को Analysis किया जाता है। अधिकांश चेहरे की पहचान 3 डी के बजाय 2 डी छवियों पर निर्भर करती है क्योंकि यह 2 डी तस्वीरों को आसानी से सार्वजनिक तस्वीरों के साथ या डेटाबेस में उन लोगों के साथ मेल कर सकती है क्योंकि कुछ विशिष्ट स्थान या बेस पॉइंट प्रत्येक चेहरे को बनाते हैं। प्रत्येक मानव चेहरे में 80 आधार बिंदु होते हैं। चेहरे की पहचान सॉफ्टवेयर आधार बिंदुओं को Analysis करेगा जैसे कि आपकी आंखों के बीच की दूरी या आपके गाल की आकृति।
  3. इमेज को डेटा में बदलना : – आपके चेहरे को स्कैन करने के बाद फेस रिकग्निशन सिस्टम इससे एक पैटर्न बना देते है, ये चेहरे की विशेषताएं एक Numeric कोड में Number बन जाती हैं। इस Numeric कोड को फेसप्रिंट कहा जाता है। Thumbprint की Unique पैटर्न के समान, प्रत्येक व्यक्ति का अपना Unique फेसप्रिंट होता है।
  4. Face मैच करना : –अब आपके फेस कोड को दूसरे डेटाबेस से Compare किया जाता है । उस डेटाबेस में पहचान के साथ तस्वीरें हैं जिनकी तुलना की जा सकती है। डेटाबेस का एक और उदाहरण जिसका कई लोगों तक पहुंच है, वह है फेसबुक की तस्वीरें। कोई भी फ़ोटो जिसे किसी व्यक्ति के नाम से टैग किया जाता है, फेसबुक डेटाबेस का हिस्सा बन जाता है और इसी फेसबुक के डेटाबेस से कुछ सुरक्षा एंजेंसी क्रिमिनल का आसानी से पता लगा लेती है। यह एक आर्टिफीसियल intelligence का भी बहुत अच्छा उदाहरण है.

इन सब टेक्नोलॉजी में कौन सी बेहतर है

2016 में सैमसंग गैलेक्सी नोट 7 के साथ फेशियल रिकॉग्नाइज सिस्टम की शुरुआत हुई थी । एप्पल ने भी इसी कड़ी में अपने आईफोन X में फेस आईडी की शुरुआत अगले साल 2017 में कर दी थी। इन फोन में सॉफ्टवेयर आपकी Identity को पहचानने के लिए आपके फेस को स्कैन करता है जिसे बस एक नजर आपके फोन के सामने और आपका फोन अनलॉक हो जाता है। अब बात आती है किन में से कौन सा बेहतर है 

मेरे विचार से एप्पल फेस आईडी सबसे बेहतर और सुरक्षित है, क्योंकि एप्पल आईफोन की फेस आईडी एक 3D फैसियल रिकॉग्निशन सेंसर पर आधारित है यह अंधेरे में भी फेस को स्कैन करने में भी सक्षम है। इस सेंसर  के 2 भाग होते हैं पहला डॉट  प्रोजेक्ट्स मॉड्यूल है  इसमें जिसमें यूजर के चेहरे पर 300 Dots का Pattern बनाया जाता है, दूसरा इंफ्रारेड मॉडल कैमरा जो  इन पैटर्न को पढ़ता है. ये पैटर्न एन्क्रिप्टेड होते है और इसे रजिस्टर्ड फेस के साथ मैच करने के लिए डिवाइस के CPU में एक लोकल Secure Enclave को भेजता है, अगर कोई यूजर 5 बार Unsuccessful  स्कैन करता है तो यह Face ID 48 घंटों के लिए Disabled हो जाती है।

साथ ही एप्पल ने यह दावा किया है कि Face ID के साथ किसी दुसरे व्यक्ति द्वारा फ़ोन को अनलॉक करने की संभावना 10,00,000 में से 1 व्यक्ति की है जबकि Touch ID में इसकी संभावना 50,000 में से 1 व्यक्ति की है जिससे आप अंदाज़ा लगा सकते है की Apple की Face ID कितनी सिक्योर होती है । साथ ही यह Face ID system टोपी, स्कार्फ, ग्लासेज पहनने पर भी आपके फेस को आसानी से पहचान लेता है ।

Uses ऑफ़ फेसिअल रिकग्निशन technology

  • सोशल मीडिया: –वर्तमान में, चेहरे की पहचान तकनीक फेसबुक पर सबसे सफल रही है, इसका उपयोग तस्वीरों में उपयोगकर्ताओं को टैग करने के लिए किया जाता है। क्योंकि फेसबुक में अरबों तस्वीरें हैं और हर दिन लाखों लोग इससे जुड़ते हैं, यह तकनीक उन तस्वीरों को पहचानने में मदद करती है और उपयोगकर्ता को एक सुविधाजनक इंटरफ़ेस देती है। इसने सेल्फी में भी क्रांति ला दी और, जिससे स्नैपचैट के एनिमेटेड लेंस, जो चेहरे की पहचान तकनीक का उपयोग करते थे, ने उपयोगकर्ताओं को देखने के तरीके को बदलने के लिए फ़िल्टर को जोड़ा। उदाहरण के लिए, डॉग फिल्टर सबसे लोकप्रिय फिल्टर है, जो स्नैपचैट की निरंतर सफलता को बढ़ावा देता है, गिगी हदीद, किम कार्दशियन जैसी लोकप्रिय हस्तियों के साथ, और नियमित रूप से डॉग फिल्टर के साथ खुद के वीडियो पोस्ट कर रही है.
  • स्मार्टफोन: – आप जानते ही होंगे कि Apple ने पहली बार अपने iPhone में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किया था, इसकी फेस आईडी में यह प्रमाणित करता है कि कोई भी दूसरा अनलॉक न कर सके या कोई दूसरा आपके फोन का इस्तेमाल न करे। फिर धीरे-धीरे सभी स्मार्टफोन कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन में इस तकनीक का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिससे यह तकनीक लोकप्रिय हो गई।
  • सुरक्षा में उपयोग: – हवाई अड्डों और बॉर्डर लाइन पर व्यक्तियों की पहचान करने के लिए डिजिटल पासपोर्ट पर फ़ोटो से मिलान करने के लिए सुरक्षा उद्देश्यों के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग किया जाता है। 2018 से, यह तकनीक लोगों की पहचान करने के लिए और भी सुविधाजनक हो गई जब उन्होंने फिंगरप्रिंट पहचान से चेहरे की पहचान में स्विच किया।
Uses / Application ऑफ़ फेसिअल रिकग्निशन technology
  • 4.शॉपिंग: – कई दुकानों में चेहरा पहचान प्रणाली होती है जो व्यक्ति को पहचानती है जब कोई व्यक्ति दुकान से कोई सामान चुराता है तो यह दुकानदार को सूचित करता है। हालांकि यह दुकान के मालिक के लिए फायदेमंद हो सकता है, अगर किसी निर्दोष व्यक्ति को सिस्टम द्वारा चोर घोषित किया जाता है तो यह उस व्यक्ति के पूरे जीवन को प्रभावित कर सकता है।

Advantage ऑफ़ फेसिअल रिकग्निशन technology

  1. Secure:- फेस रिकग्निशन सिस्टम की मदद से किसी भी चोर, या अन्य क्रिमिनल्स को ट्रैक करना आसान होगा। सरकारी स्तर पर, फेस रिकग्निशन सिस्टम केवल फेस स्कैन की मदद से आतंकवादियों या किसी अन्य अपराधियों की पहचान करने में मदद कर सकती है। कोई व्यक्ति इस टेक्नोलॉजी को हैक नहीं कर सकता है: उदाहरण के लिए, पासवर्ड के मामले में चोरी या परिवर्तन हो सकता है लेकिन चेहरे को हैक या चेंज नहीं कर सकते है।
  2. Fast Processing:- एक फेस रिकग्निशन की प्रक्रिया में एक सेकंड या उससे कम समय लगता है और यह कंपनियों के लिए से फायदेमंद सकते  है। लगातार साइबर हमलों और एडवांस हैकिंग टूल के ज़माने में, कंपनियों को एक ऐसी तकनीक की आवश्यकता होती है जो सुरक्षित और तेज दोनों होगी। चूँकि यह टेक्नोलॉजी फ़ास्ट है इसके लिए यह एम्प्लॉई का वेरिफिकेशन करना आसान हो जाता है  इसके अलावा, इस तकनीक को बेवकूफ बनाना कठिन है, इसलिए यह एक और बोनस है।
  3. Automatic Identification:-इस टेक्नोलॉजी के आने से पहले , सुरक्षा गार्डों को उस व्यक्ति की मैन्युअल पहचान करनी होती थी जो बहुत अधिक समय लेता था और हाई एक्यूरेसी भी नहीं होती थी । लेकिन आज, फेस रिकग्निशन सिस्टम पहचान की प्रक्रिया में पूरी तरह से स्वतंत्र है और न केवल सेकंड लेती है, बल्कि पूरी तरह से एक्यूरेट भी है। 3 डी फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी और इन्फ्रारेड कैमरों के उपयोग ने चेहरे की पहचान की सटीकता के स्तर को काफी बढ़ाया और इसे वास्तव में बेवकूफ बनाना मुश्किल हो गया।

अंत में

चेहरा पहचानने की तकनीक ने पिछले बीस वर्षों में एक लंबा सफर तय किया है। आज, मशीनें सुरक्षित लेनदेन और निगरानी और सुरक्षा कार्यों आदि के लिए आइडेंटिफिकेशन को स्वचालित रूप से सत्यापित करने में सक्षम हैं। वर्तमान में, 3 डी फेस अनलॉकिंग एकमात्र फेस-स्कैनिंग तकनीक है जो वर्तमान में बाजार पर सुरक्षित है जो मोबाइल भुगतान के लिए प्रमाणीकरण के रूप में उपयोग करने के लिए पर्याप्त है। यह कहा जा रहा है, एक भरोसेमंद पासवर्ड या पिन अभी भी यकीनन यहां अधिक सुरक्षित विकल्प है, क्योंकि ये सुरक्षा विशेषताएं हैं जिन्हें तोड़ना सबसे कठिन है। हां अगर यह टेक्नोलॉजी आगे और एडवांस लेवल पर जाती है तो यह  एक अच्छी ऑनलाइन ट्रांसक्शन के लिए ऑथेंटिकेशन साबित हो सकती है।

तो दोस्तों ये था फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी और इसके काम करने के तरीके के बारे में  तो आपको आज का आर्टिकल कैसा लगा बताएगा कमेंट सेक्शन में  

तो मिलते है एक नए इंटरस्टिंग आर्टिकल में तब तक के लिए गुड बाय.


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