विभिन्न प्रकार के डायोड और उनके उपयोग

 DIFFERENT TYPES OF DIOADE

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लाइट एमिटिंग डायोड

Application की आवश्यकता के हिसाब से अलग अलग प्रकार के डायोड का इस्तेमाल होता है. इन सब डायोड की प्रोपर्टी काफी अलग अलग होती हैं. आइये जानने की कोशिश करते हैं अलग अलग डायोड के बारे में.

Small signal diode 

 

ये एक छोटा device है जिसके disproportional characteristics होते है जो हाई frequency और कम current की device जैसे रेडियो, टेलीविज़न में उपयोग होता है.  इसे contamination से बचाने के लिए ग्लास में enveloped किया जाता है. इसलिए इसे glass passivated device में कहते हैं. इस diode की carrying capacity current में 150mA और power में 500mW होता है.  Signal diode silicon या germanium से doped होता है. लेकिन इसके characteristics opposite होते हैं. Silicon signal diode के हाई resistance होता है पर low forward resistance होता है परन्तु germanium के low resistance और हाई forward resistance होता है.

 

Large signal diode

इस diode में P-N जंक्शन लेयर बड़ा होता है इसलिए AC से DC बदलने में कोई limit नहीं होती. यह current forward capacity और reverse blocking वोल्टेज को भी बढाता है. लेकिन ये फंक्शनल पॉइंट को disrupt होता है इसलिए इसे हम हाई frequency application में इसतेमाल नहीं होता है. इसे हम inverter में उपयोग होता है. forward resistance ohm में और reverse blocking resistance मेगा ohm में होता है.

Zener diode:

 

यह एक passive device है जो zener ब्रेकडाउन पे काम करता है. forward bias में यह normal diode की तरह ही काम करता है. लेकिन reverse bias में भी यह current को flow करने देता है अगर applied वोल्टेज reverse ब्रेकडाउन के वोल्टेज के उपर हो जाये. ये voltage regulator में इसतेमाल होता है.

 

Light emitting diode

 

ये diodes   electrical energy को लाइट energy में बदलते है. इसका पहला  production 1968 में शुरू हुआ था. ये electroluminescence process के द्वारा जिसमे  holes और  electrons recombined होते है जिससे  energy का उत्पादन होता है. यह energy लाइट के फॉर्म में  forward bias condition में आती है.

 

Constant current diode

 

इस diode को हम current-regulating diode या constant current diode या  current-limiting diode या  diode-connected transistor भी कहा जाता है. इसका काम वोल्टेज को रेगुलेट एक particular current पे करना है. यह दो टर्मिनल current limiter की तरह काम करता है.

 

Schottky diode

 

इस diode में सेमीकंडक्टर को metal के साथ P-N जंक्शन बनय जाता है.जिसके कारण वोल्टेज ड्राप minimum हो जाता है. n-type silicon anode की तरह और metal cathode की तरह काम करते है. इसमें metal प्लैटिनम,tungsten का इसतेमाल होता है. इसकी current carrying capability ज्यादा होती है और switching में भी कम time लेता है. इसलिए इसे हम switching application में इस्तेमाल करते है. metal के कारण इसका low वोल्टेज ड्राप होता है जिससे power loss भी कम होता है. इसलिए इसे हम high frequency rectifier में उपयोग होता है.

Tunnel diode

 

इसे हम हाई स्विच की तरह इसतेमाल करते है जिसका आर्डर nano-seconds में होता है. ये tunneling effect के कारण microwave frequency region में बहुत अच्छे से काम करता है. इसमें dopant की मात्रा ज्यादा होती है.

जंक्शन capacitance और stray वायरिंग capacitance से इसका transient response लिमिटेड होता है. इसके application:

  1. Oscillatory circuits.
  2. Microwave circuits.
  3. Resistant to nuclear radiation.

 

Varactor diode

 

इसे हम varicap diode भी कहते है. इसका उपयोग variable capacitor की तरह होता है. इसे हम reverse bias स्टेट में चलाते हैं. एक constant वोल्टेज पे यह अपना capacitance एक रेंज में बदल सकता है. reverse bias की वोल्टेज बदलने पे हम इस diode में depletion layer को बदल सकते हैं.

Varactor diode के application:

  1. Voltage-controlled capacitors.
  2. Voltage-controlled oscillators.
  3. Parametric amplifiers.
  4. Frequency multipliers.

5.FM transmitters and Phase locked loops in radio, television sets and cellular telephone.

 

Vacuum diode

 

Vacuum diode में दो इलेक्ट्रोड होते है एक cathode और एक anode. cathode tungsten का बना होता है जो electron emit करता है और वो electron anode की तरफ जाति है. इसलिए यह switch की तरह काम करता है. अगर cathode को metal oxideकी परत लगे जाए तो electrons emission capability ज्यादा हो जाति है.

 

Preeti

Preeti is pursuing her engineering under electronics engineering program. She always crave to learn the technology specially which touches the newfangled part. She has a bad habit of entering into the world of programming languages. She is still trying to be a developer and in her free time she is wordsmith to write her imaginations.

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