Diode क्या होता है और कैसे काम करता है

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DIODE

Diode एक इलेक्ट्रिकल कॉम्पोनेन्ट है जो current के बहाव को एक ही दिशा (direction) जाने देता है. Diode में दो इलेक्ट्रोड होते है –cathode और anode. Diode सेमीकंडक्टर का बना होता है जैसे – silicon, germanium, selenium.  डायोड का इसतेमाल इन सब circuit में होता है –

  • Rectifiers
  • Signal Limiters
  • Voltage Regulators
  • Switches
  • Signal Modulators
  • Signal Mixers
  • Signal Demodulators
  • Oscillators .

Diode सिर्फ reverse current को रोकता है, जबकि reverse वोल्टेज का एक रेंज पहले से फिक्स होता है अगर diode उस reverse वोल्टेज के ऊपर गया तो reverse बैरियर टूट जाता है. और जिस वोल्टेज पे ये breakdown होता है उस वोल्टेज को reverse breakdown वोल्टेज कहते है.  Diode इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स circuit में एक valve की तरह काम करता है. P-N जंक्शन सबसे साधारण diode है जो forward-biased में short-circuit की तरह काम करता है. जब P-N जंक्शन reverse-biased होता है तो वह open-circuit की तरह काम करता है.

Symbol of Diode

Diode Symbol

P-N जंक्शन diode का बनावट एक तरफ डोनर (Doner) impurity को मिलाया जाता है. जैसे (aluminium) और दूसरी तरफ acceptor impurity को मिलाया जाता है. जैसे-(phosphorous). इसी कारण बीच में P-N जंक्शन बन जाता है हलांकि इसका एक हिस्सा p-type से doped होता है (trivalent ion) और दूसरा n-type से doped होता है (pentavalent).

इसे हम दूसरे तरीके से भी बना सकते है- अगर हम p-type (intrinsic सेमीकंडक्टर को doped trivalent impurity के साथ) और n-type सेमीकंडक्टर (intrinsic सेमीकंडक्टर doped pentavalent impurity के साथ) जोड़ दे तो P-N जंक्शन कण जायेगा. इसका P type anode होता है और N type cathode होता है. इनके ही दो टर्मिनल को circuit के साथ जोड़ के forward या reverse biased बनाया जाता है.

Diode का working condition

साधारणता डायोड इलेक्ट्रिक करंट को सिर्फ एक दिशा में हैं जाने देता है. जब डायोड का कैथोड टर्मिनल को नेगेटिव वोल्टेज से और एनोड को पॉजिटिव वोल्टेज से  जोड़ा जाता है तो इसमें से करंट बहने लगता है और इसे फॉरवर्ड बायसिंग कहा जाता है. और जब डायोड के एनोड को नेगेटिव वोल्टेज से जोड़ देते हैं तो यह वोल्टेज को आगे नहीं जाने देती जिसे हम रिवर्स बायसिंग कहते हैं और अगर कैथोड को पॉजिटिव से जोड़  दिया जाये तो भी यह वोल्टेज को नहीं जाने देती और इस स्थिति को भी हम रिवर्स बायसिंग करते हैं. इसके बारे में हम विसतार में आगे पढ़ेंगे.

Unbiased diode

Diode के N साइड में electrons के नंबर ज्यादा होंगे और holes के नंबर कम वही P साइड में electrons के नंबर कम होंगे और holes के ज्यादा होते हैं. इसके कारण diffusion process होता है. electrons N साइड से P साइड के तरफ जाते है और वह उससे recombine हो जाते है जिसके कारण N-side में +ve immobile ion रह जाते है. वही दूसरी तरफ P साइड से holes n साइड की तरफ जाते है और वो electrons के साथ recombine हो जाते है जिससे –ve immobile ion p साइड में रह जाते है.

इसलिए n-साइड में uncovered +ve  डोनर ion जंक्शन के edge के पास बनते है और p-साइड में –ve uncovered acceptor जंक्शन के edge के पास बनते है. इसी कारण +ve ion और –ve ion के नंबर n –साइड और p-साइड में जमा हो जाते है. और ये region जो ये चार्ज जमा होने के कारण बन रहे है उस region को depletion region कहते है क्योकि इस region में फ्री carrier का “depletion” होता है. ये positive और negative ion के कारण ही p-n जंक्शन के पास static electric field बनता है जिसे हम barrier potential कहते है. ये barrier potential इसलिए कहलाता है क्योकि ये barrier की तरह और electrons और holes को एक साइड से दुसरे साइड जाने नहीं देता है.

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Forward biased condition

 

Forward bias condition तब कहा जाता है जब p साइड diode का  बैटरी के +ve टर्मिनल के साथ और n साइड –ve टर्मिनल के साथ जोड़ा जाता है. इसे हम forward वोल्टेज diode को apply करना कहते है.जैसा की हम जानते है की जंक्शन के पास barrier potential बनता है. Barrier potential forward applied voltage के अपोजिट डायरेक्शन में होता है. इसलिए diode में current का बहाव forward दिशा में होता है जब applied forward voltage barrier voltage से ज्यादा होता है. इस वोल्टेज को forward biased वोल्टेज कहते हैं.

Silicon diode में  forward biased वोल्टेज 0.7V होता है और germanium diode में 0.3 V होता है. जब हमारा applied वोल्टेज biased वोल्टेज से ज्यादा हो जायेगा तब diode current conduct करने लगता है. इसके बाद कोई भी voltage ड्राप इस forward biased वोल्टेज के उपर diode के across नहीं हो सकता है और forward current के उपर नही कोई limit नहीं है सिर्फ जो resistor हमने diode के series में लगाते है. जब तक हमारी applied वोल्टेज की value barrier potential या forward biased वोल्टेज को cross नहीं करता तब तक diode conduct नहीं करता. जितना diode इस value तक आने में time लगता है उसे recovery time होता है.

 

Reverse biased Condition 

 

Reverse biased condition में P-N जंक्शन में P-साइड को वोल्टेज के –ve टर्मिनल से और N-साइड को वोल्टेज के +ve टर्मिनल के साथ करते हैं जिससे कोई भी current का बहाव नहीं होगा सिवाय reverse saturation current.ये इसलिए होता है क्योकि depletion लेयर जैसे जैसे हम reverse biased वोल्टेज increase करते है वैसे ही depletion लेयर भी बड़ा होता जाता है. हलांकि n-साइड के अंत से p-साइड के अंत तक tiny current का बहाव minority carrier के कारण होता रहता है. Minorty carrier thermally generated electron और holes होते है जो p-साइड और n-साइड में रहते है. अगर हम reverse bias वोल्टेज को लगातार बढ़ाते रहेंगे तो depletion layer टूट जायेगा और excess अमाउंट में current circuit में flow हो जायेगा. अगर current के value को बाहर(externally) नहीं एक limit में लिया गया तो diode ही ख़राब हो जायेगा. जैसे जैसे हम reverse current को बढ़ाते है वैसे ही जो diode में electrons रहते है उनकी kinetic energy भी बढती है. जब ये moving electrons atoms के साथ टकराते है तो और electrons  covalent bond को तोड़ कर बाहर आते है. इस process के कारण carrier का multiplication होता है जो current का flow  p-n जंक्शन में बढाता है. इस phenomenon को avalanche breakdown  कहते हैं.

 

Zener Breakdown

 

वह junction breakdown mechanism जो  heavily doped thin region में होता है उसे Zener breakdown कहते है. इस mechanism ने बहुत हाई electric फील्ड जंक्शन के across दिया जाता है इसी कारण चार्ज carrier जंक्शन के across जम्प करने लगता है.ये electrons ही circuit में heavy current का reverse डायरेक्शन में बहाव करवाता है. यह एक temporary ब्रेकडाउन है. अगर हम reverse वोल्टेज को हटा दे तो वह वापस अपने original पोजीशन पे वापस आ जाता है.

 

Comparison Chart

Basis of comparison

avalanche

zener

depletion region thick thin
junction destroy Not destroy
Electric field low high
produces Pair of electrons and holes electrons
doping low high
Reverse potential high low
Breakdown voltage Directly proportional to temperature Inversely proportional to temperature
After breakdown Voltage vary Voltage remains constant
Ionization Because of collision Because of electric field

 

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