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Cyber Crime क्या है? टाइप्स और बचाव ?

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वैसे तो हम बचपन में विज्ञानं के चमत्कार पर शुरू से ही निबंध लिखते हुए बड़े हुए हैं. पर आपको ध्यान होगा की सारी तारीफ़ करने के बाद अंत में हम विज्ञानं से होने होने वाले नुक्सान के बारे में भी बात करते थे. आज उसी दिशा में एक और नयी टर्म जुड़ गयी है, जिसका नाम है साइबर क्राइम. जी हाँ सुनने में जितना यह अलग दुनिया का शब्द हैं उतना ही खतरनाक है और आज इस technology के समय में कोई भी इसका शिकार आसानी से हो सकता है. तो क्या है ये साइबर क्राइम, कैसे हम सतर्क रह सकते हैं, बचने के क्या क्या उपाय हैं. चलिए जानते है

साइबर क्राइम क्या है?

साइबर क्राइम एक ऐसा अपराध है जो कंप्यूटर हैकिंग, स्पैमिंग और फिशिंग से रिलेटेड है । इसमें साइबर क्रिमिनल इंटरनेट और कंप्यूटर टेक्नोलॉजी के ज़रिये किसी भी व्यक्ति के पीसी या स्मार्टफोन को हैक करके उस व्यक्ति के व्यक्तिगत जानकारी , फोटोस, सोशल मीडिया हैंडल को अवैध तरीके से चुरा लेता है। इन साइबर क्रिमिनल को ही इंटरनेट की दुनिया में हैकर कहा जाता है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इन समस्याओं से निपटने की कोशिश कर रही है, लेकिन हैकर रोज़ के रोज़ बढ़ते जा रहे है और लोगो की जानकारियां हैक करके उनसे मन चाही रकम मांग रहे है।   

Cyber Crime kya hai

साइबर क्राइम की केटेगरी

साइबर क्राइम से प्रभावित होने वालों के आधार पर इन्हें मोटा मोटा तीन कैटेगरी में डिवाइड किया जा सकता है

इंडिविजुअल 

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इसमें जो साइबर क्राइम का शिकार होता है कोई इंडिविजुअल व्यक्ति होता है चाहे वह साइबर bullying का शिकार हो या फिर पोर्नोग्राफी या फिर किसी के एटीएम से पैसे निकलना. इस प्रकार के साइबर क्राइम इंडिविजुअल कैटेगरी के अंदर आते हैं. इस तरह की साइबर क्राइम को रोकने के लिए अभी काफी काम हो रहा है और छोटे-मोटे हैकर अभी पकड़ने में आने लगे हैं.

आर्गेनाइजेशन

इस तरह के साइबर क्राइम किसी एक संस्था के विरुद्ध होते हैं. कई बार कुछ संस्थाएं किसी विश्वास या philosophy पर काम कर रही होती है जिससे किसी व्यक्ति या किसी अन्य ग्रुप द्वारा पसंद नहीं किया जाता.  और ये लोग/ग्रुप उन  संस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए उन पर साइबर अटैक कर सकते हैं. इसके अंतर्गत ये लोग उन से रिलेटेड उनकी जानकारियां चुरा सकते हैं या फिर उनके बैंक अकाउंट को हैक किया जा सकता है. आजकल क्षेत्र में एक नया चलन जो देखने में आया है, वह ransomware इनस्टॉल  करना. इसमें ऑर्गेनाइजेशन में सभी कंप्यूटर को हैक कर लिया जाता है और उन पर ransom यानि की फिरौती मांगने के लिए एक मैसेज डिस्प्ले होता है. जब तक आप उन्हें फिरौती की रकम नहीं दे देते तब तक वो लोग आपका डाटा encrypt करके रख देते हैं और आपका सारा डाटा useless हो जाता है.

नेशन

 इस तरह का साइबर क्राइम  किसी देश की गवर्नमेंट को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है कई बार साइबर टेररिज्म का भी नाम दिया जाता है हालांकि है अभी ज्यादा काम नहीं है क्योंकि इसके लिए ज्यादा अंतरिक्ष की टीम की आवश्यकता होती है पर ऐसा माना जाता है कि अगर अगला वर्ल्ड वार होता है तो cyber-attack उसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा क्योंकि काफी हद तक टेक्नोलॉजी करता है साइबर अटैक होता है तो किसी भी देश की क्षमता को काफी हानि पहुंच सकती है

साइबर क्राइम के टाइप्स

अभी विश्व में कहीं न कहीं साइबर अटैक हो रहा है जिससे काफी कंपनियों और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । पर ये किस किस तरह से हो सकता है, वो जानना जरुरी है, तो आईये जानते है कुछ साइबर क्राइम के टाइप्स के बारे में:-

  1. Cyber Piracy & Copyright:- यह एक ऐसा क्राइम है जिसमे कोई व्यक्ति कॉपीराइट को फॉलो किये बिना कोई Paid Songs , Movies, Books को अवैध रूप से पायरेटेड साइट्स से डाउनलोड करता है जिससे इन वेबसाइट कोई सॉफ्टवेयर की पायरेसी करने में बढावा मिलता है और वही दूसरी जगह सॉफ्टवेयर कंपनी को बहुत Loss होता है । जैसे कोई व्यक्ति किसी सॉफ्टवेयर का लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन लेना चाहता है लेकिन वो सब्सक्रिप्शन Paid होता है तो वह व्यक्ति कसी पायरेटेड साइट्स से उस सॉफ्टवेयर का क्रैक डाउनलोड कर लेगा और वह सॉफ्टवेयर उस वेबसाइट पर फ्री में उपलब्ध होता है जिसमे Lifetime सब्सक्रिप्शन होता है । लेकिन कुछ सुरक्षा एजेंसियां जैसे FBI, CIA आदि ऐसे वेबसाइट को टारगेट करती है और इन साइबर क्रिमिनल का पता लगाती है ।
  2. Cyber Stalking:– कुछ मनचले प्रेमी या किसी और गलत intention रखने वाले लोग, stalk यानी किए छिप कर उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं और अलग अलग तरीके से मेसेज पहुंचाकर परेशान करते हैं.  यह एक प्रकार का ऑनलाइन शोषण होता है जिसमे किसी व्यक्ति को ऑनलाइन मैसेज और ईमेल के जरिए परेशान किया जाता है। आमतौर पर जो ये क्राइम करते है वो परेशान करने वालो को पहले से ही जानते है और उन्हें सामने से गलियां ना दे कर उन्हें ऑनलाइन तरीके से गलत शब्द बोलते है, इसी को ही साइबर स्टॉकिंग कहते है। कुछ क्रिमिनल ऐसे होते है जो यह देखते है की अगर व्यक्ति को ऑनलाइन साइबर स्टॉकिंग से फर्क नहीं पड़ा है तो वे उन्हें उस हद तक परेशान कर देते है कि पीड़ित व्यक्ति को आत्महत्या तक करना पड़ जाता है।
  3. Identity Theft & ATM Cloning:-यह क्राइम उन लोगो के लिए समस्या का कारण बन गया है जो डेली इंटरनेट बैंकिंग या ऑनलाइन ट्रांसक्शन करते है , क्योंकि इस तरह के क्राइम में क्रिमिनल यूजर के अकाउंट , क्रेडिट कार्ड , डेबिट कार्ड की इनफार्मेशन को ले कर पैसो की ऑनलाइन चोरी करता है या उस व्यक्ति के नाम से ऑनलाइन शॉपिंग कर लेता है। इससे यूजर को एक साथ बहुत पैसो का घाटा हो जाता है और यह तक की उसके बैंक रिकॉर्ड और ट्रांसक्शन रिकॉर्ड पर भी बहुत इफ़ेक्ट पड़ता है। डेबिट और क्रेडिट कार्ड की जानकारी को कलेक्ट करके उसी तरह का एटीएम बना कर पैसे चुराने को एटीएम क्लोनिंग कहा जाता है।
ATM Cloning

4. Child Pornography & Abusing:- यह सबसे घिनौना साइबर क्राइम है क्योंकि इसमें क्रिमिनल नाबालिगों को पोर्नग्राफी के उद्देश्य से चैट रूम के माध्यम से बच्चों को यौन सम्बन्ध बनाने के लिए उत्तेजित करता है। इसमें क्रिमिनल यौन एक्टिविटी में शामिल बच्चों की तस्वीरें लुभावने तरीके से इंटरनेट पर डालते है और इन तस्वीरों का वो बिज़नेस करते है। उदाहरण के लिए एक पंद्रह वर्ष की लड़की को क्रिमिनल इंटरनेट पर चैट करता है और धीरे धीरे उस लड़की को अपने जाल में फंसा लेता है , और बाद में वो लड़की से उसकी कुछ पर्सनल  फोटोज की मांग करता है जब कोई लड़की उससे अपने फोटोज दे देती है तब वो क्रिमिनल उसका गलत यूज करके उस फोटोज को इंटरनेट पर वायरल कर देता है। इस तरह की एक्टिविटी को चाइल्ड पोर्नग्राफी कहते है।

5. Malicious Software:- ये क्राइम इंटरनेट पर किसी अनवांटेड लिंक से सॉफ्टवेर डाउनलोड करने पर आधारित है, इस क्राइम में हैकर किसी सॉफ्टवेयर में वायरस डाल देते है जिससे उस सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने वाले किसी भी यूजर का सारा डेटा उस हैकर के पास चला जाता है, या हैकर हैक किये हुए सॉफ्टवेयर के द्वारा कंप्यूटर में इनस्टॉल बाकि सॉफ्टवेयर को क्रैश कर देता है जिससे कंप्यूटर सिस्टम Corrupt हो जाता है। और कभी-कभी हैकर बड़ी बड़ी कम्पनियों के सिस्टम को हैक करके उन्हें लॉक कर देता है और उस लॉक की Key के बदले में उनसे बड़ी मात्रा में पैसो की मांग करते है ।

6. Fraud Call:– आपने इस क्राइम के बारे में बहुत सुना होगा और शायद आपके पास भी इस तरह का फ्रॉड कॉल आया होगा । इस तरह के क्राइम में क्रिमिनल आपको फेक मैसेज , कॉल या ईमेल के ज़रिये आपसे कांटेक्ट करते है जिसमे वो खुद को किसी बैंक का अधिकारी बताते है और आपके अकाउंट को रिएक्टिव करने के लिए आपसे कुछ पर्सनल डिटेल जैसे एटीएम कार्ड डिटेल और पासवर्ड आदि या वो खुद के द्वारा भेजी गयी लिंक पर क्लिक करने को बोलता है। अगर आपने गलती से उन पर भरोसा करके उन्हें वो डिटेल दे दी तो आप अपने अकाउंट में रखे पैसो को खो सकते है। ध्यान रखें की कभी भी किसी भी बैंक से ऐसी कोई इनफार्मेशन नहीं मांगी जाती है जो सेंसिटिव हो और हमें भी  भूलकर भी कभी इंटरनेट या फ़ोन कॉल किसी अनजान व्यक्ति को अपने अकाउंट सम्बंधित कोई इनफार्मेशन नहीं देनी चहिये।

7. Fake Social Media News:– कुछ साइबर क्रिमिनल ऐसे होते है जो बस सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सामाजिक , धार्मिक और राजनैतिक अफवाहें फैलाने का काम करते है और इससे प्रभावित होकर यूजर जाने -अनजाने में हैकर द्वारा शेयर की गयी लिंक को या पोस्ट को अपने सोशल मीडिया पर शेयर कर लेता है। इससे यूजर को परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है, ध्यान रखे सोशल मीडिया पर किसी अवैध लिंक या पोस्ट को शेयर करना भी साइबर क्राइम की कैटेगरी में में आता है । अतः इन चीजों से बचे और सोशल मीडिया पर किसी के बहकावे में आकर ऐसा काम ना करे जिसे आपकी पूरी जिंगदी बर्बाद हो जाए ।

8. Online illegal selling (Dark Web): – इस क्राइम में एक क्रिमिनल अवैध हथियार, ड्रग्स, तस्करी का सामान या किसी व्यक्ति की निजी जानकारी को एक अवैध ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म पर बेच देता है और इससे होने वाला ट्रांसक्शन भी बिटकोईन जैसी करेंसी में होता है। इससे आतंकवाद और कालाबाज़ारी करने वाले व्यक्तियों को बढ़ावा मिलता है। उदाहरण के लिए जैसे Dark web एक ऐसा डार्क वेब वर्ल्ड वाइड वेब का कंटेंट है जो डार्कनेट्स, नेटवर्क पर मौजूद हैं लेकिन एक्सेस करने के लिए विशिष्ट सॉफ़्टवेयर, कॉन्फ़िगरेशन या प्राधिकरण की आवश्यकता होती है। इस वेब सर्च पर सब कुछ अवैध सामानों की लेनदेन होती है। अब आप सोच रहे होंगे की अगर यह अवैध है तो इससे बहुत कम लोग ही यूज करते होंगे तो आप गलत है , डार्क वेब के 100-200 यूजर नही है इसके पूरे विश्व में लाखों यूजर है और इन यूजर की संख्या रोज बढ़ती जा रही है।

Dark Web

9. Online Gambling (Pokar,Casino):– ऑनलाइन जुआ एक प्रकार का जुआ है जिसको सिर्फ इंटेरेंट से ही एक्सेस कर सकते है इनमे वर्चुअल पोकर, कैसिनो और स्पोर्ट्स बेटिंग  आदि शामिल है। यह ऑनलाइन जुआ आम जनता के लिए 1994 में खोला गया था और जिसकी आज पूरे विश्व में इसके हर बाजार की कीमत लगभग 40 बिलियन डॉलर है। कई देखों में ऑनलाइन जुआ चलने वाली कंपनी या व्यक्ति को एक वैलिड लाइसेंस की जरूरत होती है, लेकिन कुछ देशों में यह बिना लाइसेंस के अवैध रूप से चलाया जाता है। उदाहरण के लिए आपने Teen Patti का नाम तो सुना ही होगा और इसे कभी खेला होगा  इसमें पोकर जैसा गेम आपको ऑनलाइन खलेने को मिल जाते है, इस प्रकार कंपनी ऑनलाइन गैंबलिंग करने की सर्विस एक यूजर को देती है।

10. Online Scam:- इस प्रकार के धोखे आमतौर पर विज्ञापन या ईमेल के जरिये किये जाते है जिसमें लॉटरी या अवार्ड देने का वादा करते है और इसको एक अटरैक्टिव तरीके से प्रेजेंट करते है जिससे यूजर इनके झांसे में आ जाते है और हैकर द्वारा भेजी गयी लिंक पर क्लिक कर देते है जिससे हैकर उनके पैसो का घोटाला कर देते है। हमेशा ध्यान रखे कभी भी कोई व्यक्ति आपको फ्री का पैसा नहीं दे सकता है, हमेशा सतर्क रहे और सावधान रहे !

तो ये थे ऑनलाइन साइबर क्राइम के कुछ टाइप्स जिसे हमने पढ़ा , तो चलिए अब पढ़ते है इससे कैसे सेफ रह सकते है?


साइबर क्राइम से कैसे बचे?

  1. Strong Password: – एक यूजर को ऑनलाइन अलग अलग अकाउंट के लिए अलग अलग ID और Password रखने चाहिए और पासवर्ड में कम से कम 10 करैक्टर होने चाहिए जिसमे कुछ स्पेशल करैक्टर(.,@#), अक्षर(a,b,c), नंबर्स(1,2,3,) हो और उनका कॉम्बिनेशन बना कर पासवर्ड बनाना चाहिए । और महीने में कम से कम 2 बार अपने पासवर्ड को बदलते रहना चाहिए
  2. Safe Your Computer: – जब भी हम अपने कंप्यूटर में कोई वेबसाइट को सर्च करते ही तो सबसे पहले हमे अपने कंप्यूटर में फ़ायरवॉल को on कर लेना चाहिए क्योंकि फ़ायरवॉल ऑनलाइन इन्फेक्टेड और Unsecure वेबसाइट को पहले ही ब्लॉक कर देगा, जिससे हम कुछ प्रकार एक वायरस और हैकर्स से सिक्योर रहेंगे। और कभी भी वेबसाइट पे अपनी निजी जानकारी ना डाले।
  3. Use Antivirus:– हम कभी-कभी अपना पेन ड्राइव या किसी और का कोई पेन ड्राइव या External डिवाइस अपने कंप्यूटर से कनेक्ट करते है और इसमें वायरस का हमारे कंप्यूटर में आने का रिस्क रहता है। इसकी सिक्योरिटी के लिए हमे अपने कंप्यूटर में किसी अच्छी कंपनी का एंटी वायरस इंस्टॉल करना चहिये, जिससे ये एंटी वायरस बाहर से कनेक्ट होने वाले डिवाइस को पहले उसे स्कैन करेगा फिर परमिशन देगा और अगर को वायरस पाया जाते है तो एंटी वायरस उससे आटोमेटिक ही रिमूव कर देगा । और हेमशा अपने एंटी वायरस को Up to date रखे जिससे आपका कंप्यूटर नए वायरस से सिक्योर रहेगा। 
  4. Secure Social Media Profile: – एक ऑनलाइन यूजर को अपने सोशल नेटवर्क जैसे फेसबुक , इंस्टाग्राम और ट्विटर के अकाउंट को हमेशा प्राइवेट रखना चाहिए और हमेशा अपने अकाउंट की सिक्योरिटी सेटिंग को चेक करते रहना चहिये। कभी भी जिन्हे आप पर्सनली नही जानते हो उन्हें अपनी फ्रेंड लिस्ट में ना जोड। सोशल नेटवर्क पर अपनी लाइव लोकेशन या लाइव इनफार्मेशन को शेयर ना करे या अपनी निजी फोटो कभी भी इंटरनेट पर पोस्ट ना करें क्योंकि एक बार जो इंटरनेट पर पोस्ट हो गयी बाद में वो कभी नही हटती है वो परमानेंट सेव हो जाती है। हैकर इन सब चीज़ों का एक कॉम्बिनेशन बना कर एक यूजर के बारे में सारी डिटेल जान सकते है जैसे उसकी पसन्द नापसंद, आपका घर ,आपकी जॉब प्रोफाइल आदि ।
  5. Secure Your Mobile:- आपका मोबाइल तब तक वायरस और हैकर की चपेट में नहीं आ सकता जब तक आप किसी Unknown साइट्स कोई एप्लीकेशन अपने फ़ोन में डाउनलोड ना कर ले , इसलिए हमेशा अपने स्मार्टफोन में Trusted सोर्स से ही एप्लीकेशन डाउनलोड करे। और हमेशा अपने स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करते रहे, क्योंकि पुराने सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम में वायरस के हमले की आशंका ज्यादा रहती है  । 
  6. Secure Data:– एक यूजर के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है उसका ऑनलाइन Data, अगर वह डाटा किसी हैकर द्वारा चुरा लिए जाता है तो वह उस व्यक्ति के लिए बहुत समस्या का कारण बन सकती है। इससे बचने के लिए एक यूजर को अपने सेंसिटिव डेटा जैसे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल या ऑनलाइन ट्रांसक्शन रिकार्ड्स के लिए एन्क्रिप्शन का यूज़ करे। और साथ ही अपने इम्पोर्टेन्ट डेटा का Backup ले कर रखे और उसे किसी दूसरे डिवाइस में सेव करके रखें, ताकि किसी प्रकार का डेटा Loss होने पर उसे रिकवर कर सकते है ।
  7. Protect E-Identity: – कभी भी इंटरनेट पर अपना नाम, पता, फ़ोन नंबर जैसी निजी जानकारी देने से पहले ये चेक कर ले की वह वेबसाइट सिक्योर है या नहीं, जैसे ऑनलाइन शॉपिंग करने से पहले वेबसाइट को देखे की वह वेबसाइट कही आपकी इनफार्मेशन किसी थर्ड पार्टी वेबसाइट को तो सेंड नहीं कर रहा है ,और हमेशा Trusted वेबसाइट से ही ऑनलाइन शॉपिंग करना चाहिए जिससे आपका पैसा और आपकी जानकारी दोनों सिक्योर रहे ।
  8. Avoid Being Scammed:– एक यूजर को हमेशा किसी ऑनलाइन लिंक या फाइल को ओपन करने से पहले उसके उसके सोर्स को चेक कर लेना चहिये। कभी भी बिना वेरीफाई किये किसी भी लिंक को ओपन नही करना चाहिए और उन ईमेल का भी रिप्लाई ना दे जिसमे आपको कोई लॉटरी या इनाम के लिए आपसे सिक्योरिटी के लिए कुछ अमाउंट ट्रांसफर करने को बोले।और हमेशा ऐसे ईमेल को रिपोर्ट कर दे जिससे अगली बार ईमेल ना आ पाये ।
  9. Parental Control:– इस ऑनलाइन टेक्नोलॉजी के ज़माने में पेरेंट्स को अपने बच्चों की ऑनलाइन सभी एक्टिविटी पर निगरानी रखनी चहिये। बच्चों के कंप्यूटर को हमेशा घर के बीच में होना चाहिए ,ताकि पेरेंट्स की नज़र हमेशा बच्चों पर रह सके , और उनकी नियमित  ब्राउज़र हिस्ट्री और ईमेल चेक करते रहना चहिये। और जरूरत पड़े तो उनके कंप्यूटर में पैरेंट कण्ट्रोल सेटिंग्स on रखे जिससे वो सिर्फ उन्हीं साइट्स को एक्सेस कर पाएंगे जो सिक्योर हो ।
  10. Aware: -हैकर्स केवल वो ही नही होते हैं जो इनफार्मेशन को हैक करते है , एक व्यक्ति अपने आप को इंटरनेट पर मौजूद स्कैम और हैकिंग के टाइप्स के बारे में जानकारी ले कर उनसे कैसे बचना है आदि के नॉलेज से हैकर से एक कदम आगे रह सकते है। फिशिंग के फेमस हैकिंग का तरीका है जिसमे हैकर अपने आप को किसी कंपनी का अधिकारी बता कर आपसे आपकी निजी जानकारी ले लेता है, लेकिन एक व्यक्ति नवीनतम फिशिंग अटैक्स की इंटरनेट से जानकारी ले कर उन सब ठगी से बच सकता है जो बाकि लोगो के साथ हुए थी । इसलिए खुद सिक्योर रहे और अपने आस पड़ोस वालों को भी इन स्कैम के बारे में बताएं और उन्हें जागरूक करे .

साइबर अटैक का शिकार होने पर क्या करें ?

अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह साइबर क्राइम का शिकार हुआ है और वह अपनी कंप्लेंट दर्ज कराना चाहता है. तो नीचे दिए गए हेड ऑफिस पर फोन या ईमेल द्वारा संपर्क करके साइबर क्राइम की सूचना दी जा सकती है. एटीएम से रिलेटेड होने वाली चोरियों या साइबर क्राइम को उन्हीं बैंकों की वेबसाइट पर या उनके टोल फ्री नंबर पर बता कर सूचित किया जा सकता है. तीन दिन के अन्दर सूचना देने पर पैसा जाने का खतरा नहीं है.  जैसे-जैसे साइबर क्राइम का प्रचलन बढ़ा है उसी तरह उसके अगेंस्ट काफी स्टेप्स लिए जाने लगे हैं और साइबर क्राइम सेल का भी बैंकों में तथा हेड क्वार्टर लेवल पर गठन हुआ है.

Cyber crime victim होने पर क्या करें ?

नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप हर क्षेत्र के नोडल ऑफिसर की मोबाइल नंबर और कांटेक्ट डिटेल्स पा सकते हैं.

https://cybercrime.gov.in/Webform/Crime_NodalGrivanceList.aspx

अंत में

आज हैकर बड़ी मात्रा में दुनिया में फैले हुए है लेकिन इन हैकर्स का पता लगाने के लिए कई सरकारी और प्राइवेट एजेंसियां काम कर रही है जैसे  FBI ,CIA, लेकिन हमारा भी कुछ कर्तव्य है की हम अपना और अपने परिवार का ऑनलाइन धोखाधड़ी से सुरक्षा करे।। इसके  अलावा जो लोग अशिक्षित है उन्हें डेबिट कार्ड , क्रेडिट कर्द, इंटरनेट और कंप्यूटर के बारे में बताना चहिये। हम जानते है इन हैकर्स को पकड़ना थोड़ा मुश्किल काम है क्योंकि वे एक देश में बैठकर कंप्यूटर से किसी अन्य देश के कंप्यूटर को हैक कर लेते है, इसलिए इन सब चीज़ों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है की हमें ही सावधान और सतर्क रहना पड़ेगा और हमेशा इंटरनेट पर सभी ID और Password को यूनिक और स्ट्रांग रखना चाहिए । और अंत में यही कहना चाहूंगा कि आप इंटरनेट का सही इस्तेमाल करोगे और सिक्योर वेबसाइट को यूज़ करोगे तो हैकर द्वारा आपको हैक कर पाना मुश्किल हो जाएगा ।

तो दोस्तों आज आपने जाना साइबर क्राइम और उससे बचने के बारे में तो कैसा लगा आपको आज का आर्टिकल बतायेगा कमेंट सेक्शन में  मिलते है एक नए इंटरस्टिंग आर्टिकल में तब तक के लिए गुड बाय.


और हाँ, आपके पास भी है कोई जबरदस्त टेक्नोलॉजी से रिलेटेड मसाला और आपको है लिखने में जरा सा भी इंटरेस्ट तो आप हमे अपने आर्टिकल्स aryan.yudi@gmail.com पर भेज सकते हैं. हम पब्लिश करेंगे अपनी वेबसाइट पर. और आपको ये आर्टिकल अपने दोस्तों के साथ whatsapp या किसी भी सोशल मीडिया पर शेयर करना हो तो आप नीचे दिए गए icons से कर सकते हैं.

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