क्या है चंद्रयान 2 ? मिशन, पार्ट्स और फ्यूचर.

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आजकल जिधर देखो चंद्रयान की बाते हो रही हैं. करोडो लोगो ने बेसब्री से चंद्रयान 2 की लैंडिंग को आँखे गढ़ाये टीवी पर देखा. छोटे छोटे बच्चे आजकल ISRO जॉइन करने की बाते कर रहे हैं. तो आज हम चंद्रयान 2 की ही बात करेंगे जिसे भारत और ISRO की बहुत बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है!

चंद्रयान 1 से कैसे अलग ?

चलिए उसके पहले ये समझते है की चंद्रयान 2 की जरुरत क्या थी और चंद्रयान 2, चंद्रयान 1 से कितना अलग है. चंद्रयान 1, 22अक्टूबर 2008 को लांच हुआ था चंद्रयान 1, 312 दिन तक चाँद के मिशन पर था. इसके main purpose चाँद के 3400 चक्कर लगाना था.वही दूसरी और चंद्रयान2 को चाँद पर लैंड करना था. चंद्रयान1 का काम north pole पर बर्फ और पानी की खोज करने का था. और चंद्रयान1 को उस ज़माने में भेजने में करीब करीब 450 करोड़ का खर्च आया था और चंद्रयान1 का वजन 1385 किलो था !       

चंद्रयान 2 के कुछ stats

चंद्रयान 2 को 22 जुलाई 2019 को सतीश धवन स्पेस सेंटर से लांच किया गया था जो कि श्री हरिकोटा मे स्थित है. इसे भारत के सबसे बड़े राकेट से लांच किया गया था. जिसका नाम GSLV MARK-III था.  इस राकेट में तीन मोड्यूल वाला ऑर्बिटर ,और लैंडर (विक्रम ) और रोवर (प्रज्ञान) था! इस मिशन के तहत ISRO लैंडर को चाँद के south pole पर उतारना चाहता था. पर दुर्भाग्यवश ऐसा नही हो सका. इस बार चंद्रयान 2 का वजन 3877 किलो था जो की चंद्रयान 1 से तीन गुना ज्यादा भारी था. इस राकेट के अन्दर प्रज्ञान रोवर था. जिसकी रफ़्तार 1 सेंटीमीटर प्रति सेकंड है! और इस राकेट को 384400 किलोमीटर की दूरी तय करनी थी ! और एक मजेदार फैक्ट. आपको जनके बहुत ही हैरानी होगी कि हम केवल चाँद का 59% भाग ही देख सकते है !

सबसे सस्ता Mission.

और चंद्रयान 2 में इस बार अलग ही प्रकार का ईंधन- UDMH(unsymmetrical dimethyl hydrazine)  का प्रयोग किया गया था ! और इस महान-चंद्रयान 2 मिशन में 978 करोड़ (603 करोर स्पेस उपकरण और 375 करोर लांच वहिकल में ) का खर्च आया था जो की मिशन के हिसाब से सामान्य है ! और ISRO इस विशेषता के लिए हमेसा से प्रसिद्ध है जैसा की उसने मंगल्यान के दौरान रिकॉर्ड बनाया था (सबसे सस्ते मिशन) !

आर्बिटर क्यूँ ?

जो ऑर्बिटर चंद्रयान के साथ गया है वो चाँद की कक्षा में पहुचने के बाद एक साल तक चाँद के चक्कर कटेगा और साथ ही साथ चाँद की दुर्लभ फोटो भेजेगा और यह चाद का नक्शा तैयार करेगा और इसका एक मुख्य कार्य है पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन कायम रखना !

लैंडर और रोवर क्यूँ?

वही दूसरी और लैंडर और रोवर जो कि चंद्रयान 2 के साथ गए है वह राकेट से अलग होकर चाँद की सतह पर जायेंगे और लैंडर विक्रम के अन्दर ही हमारा रोवर प्रज्ञान उपस्थित है. जब लैंडर विक्रम वहा चाँद की सतह पर उतरेगा तब रोवर उसमे से अलग हो जायेगा और ये दोनों अलग हो जायेगे ! चाँद की सतह पर 1 दिन (जो की पृथ्वी पर 14 दिन के बराबर होता है) !

लैंडर (विक्रम) चाँद पर रहकर टेस्ट करेगा कि चाँद की सतह पर भूकंप आते है की नही और जो जानकारी प्राप्त होगी वह उसे पृथ्वी पर भेजेगा ! और जहा तक बात है रोवर(प्रज्ञान) वह भी चाँद की सतह पर 1 दिन रहेगा और वहा पर चाँद की सतह पर खनिजो की खोज करेगा !

कनेक्शन कैसे टूटा ?

पर इतनी मेहनत के बाद भी ISRO इस मिशन में सफलता तक नही पहुच सका क्योकि जब लैंडर अपने चाँद के सभी चक्कर पूरे करके लैंड होने ही वाला था तभी चाँद की सतह से 2.1 किलोमीटर ऊपर ही उसका कनेक्शन पृथ्वी से टूट गया इसकी वजह लैंडर विक्रम की बड़ी हुई गति को बताया जा रहा है क्योकि चाँद पर ग्रेविटी पृथ्वी से कम है और इसी कारड उसकी गति बढ़ गयी होगी !

आगे क्या ?

पर ISRO अभी भी उससे सम्बन्ध बाँधने की कोशिश कर रहा है और उसमे एक सफलता भी प्राप्त हुई क्योकि ऑर्बिटर जोकि चाँद के चक्कर एक साल तक कटेगा उसने लैंडर की फोटो भेजी है जिससे पता चला है की लैंडर(विक्रम) की चाँद की सतह पर क्रेश लैंडिंग हुई है और वह चाँद की सतह पर सीधे लैंड होने के बजाये टेढ़ा लैंड हुआ है !

अगर यह मिशन सफल हो जाता तो भारत चाँद पर पहुचने वाला चौथा देश बन जाता (USA , RUSSIA , CHINA के बाद ) !   

हमें अपने वैज्ञानिको पर बहुत गर्व है और पूरा विश्वास है की हमारे वैज्ञानिक इसमें एक न एक दीन अवस्य सफलता प्राप्त करेंगे !!

!! जय हिन्द जय भारत !!

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