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Captcha क्या है और कैसे काम करता है ?

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जब भी आप कभी कोई वेबसाइट विजिट करते हैं,  गूगल पर अकाउंट बनाते या कोई भी वेबसाइट पर कहीं पर sign up करने के लिए जाते हैं,  ये अजीब सी बीमारी तो आपने देखी ही होगी. जाने अनजाने में इस अजीब सी चीज से आप नफरत करते होंगे. और सबसे ज्यादा दुख तो तब होता है जब आप आईआरसीटीसी पर तत्काल टिकट कराने बैठे हैं और यह Captcha एक दो बार गलत होकर आपके कंफर्म टिकट मिलने की जो छोटी मोटी आस रहती है उस पर भी पानी डाल देता है. Facebook पर एक दो बार पासवर्ड क्या गलत हो जाए एक भारी भरकम सा captcha आपके सामने आ जाता है.

facebook captcha

क्या है Captcha ?

शायद आपको न पता हो परन्तु कैप्चा (captcha) में एक्चुली हर एक वर्ड का अलग-अलग मीनिंग है.

CAPTCHA stands for Completely Automated Public Turing Test to Tell Computers and Humans Apart. 

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Captcha का मेन उद्देश्य यह है कि किसी भी App पर या वेबसाइट पर जो भी यूजर है उसके बारे में ये जानना कि, वह एक्चुअल में कोई person है या फिर कोई bot. इसके लिए यह कुछ अलग-अलग प्रकार के चेक करता है और वो चेक्स इस तरह डिजाईन होते हैं कि उन्हें सिर्फ human ही क्लेयर कर सकते हैं और इन चेक्स को मशीन क्लियर नहीं कर पाती. इससे होता ये है कि एप्स और वेबसाइट जान पाते हैं कि है फलाना user रियल में कोई person है या फिर कोई स्क्रिप्ट रन करके कोई प्रोग्राम ही उस वेबसाइट को एक्सेस करना चाहता है. अब आप सोच रहे होंगे कि कोई ऐसा प्रोग्राम या स्क्रिप्ट क्यों बनाएगा जिससे कि कोई साइन अप करना चाहेगा या वेबसाइट का कंटेंट access करना चाहेगा. चलिए वो भी देखते हैं.

captcha explained.

Captcha की क्या आवश्यकता है ? 

डिनायल ऑफ़ सर्विस अटैक

कुछ सिरफिरे लोग या हैकर इस तरह का प्रोग्राम या स्क्रिप्ट लिखते हैं जिससे कि किसी भी वेबसाइट में बार-बार साइनअप करके, same टाइप की इनफार्मेशन को लूप में बार बार continuously पूछा जाता है जिससे कि सर्वर हैंग हो जाता है. इस तरह के अटैक को डी ओ एस (DOS) यानी के डिनायल ऑफ़ सर्विस कहा जाता है. इसमें हैकर या कहें इस सिरफिरे दिमाग वाले एक पर्टिकुलर सोर्स (सर्वर) को अनअवेलेबल करना चाहते हैं तो एक उसमें एक प्रोग्राम अटैक कर बहुत ज्यादा अमाउंट में उस सर्वर पर रिक्वेस्ट भेजता है और वह रिक्वेस्ट इतनी ज्यादा होती हैं कि सरवर उसे रिटर्न करने में इनकैपेबल हो जाता है और फाइनली डाउन हो जाता है.

सर्वर क्रेश स्क्रिप्ट्स

कोई रियल व्यक्ति इतनी जल्दी जल्दी रिक्वेस्ट नहीं भेज सकता जितनी जल्दी की प्रोग्राम. इसलिए कैप्चा का इस्तेमाल किया जाता है और वेबसाइट या ऐप डिसाइड करते हैं कि हां यह रियल आदमी है और उसे ही अपनी सर्विस प्रदान करते हैं. अगर कोई bot या स्क्रिप्ट होती है तो वह captcha को क्लियर नहीं कर पाएगी और वेबसाइट उसे सर्विस अक्सर देने से मना कर देगा.

स्पैमिंग (Spamming)

फिर आपने फेसबुक तथा और कई सोशल मीडिया पर ऐसे लोग देखे होंगे जो अपने प्रोडक्ट का या अपना खुद का एडवर्टाइजमेंट करते रहते हैं ताकि उनकी वेबसाइट पर ट्रैफिक आये या उनका ऐप ज्यादा से ज्यादा देखा जाए. इन्हें इस technology की दुनिया में spam कहा जाता है. इस काम को रोकने के लिए भी Captcha आजकल लगभग सब जगह इस्तेमाल किया जा रहा है. 


कैप्चा कैसे काम करता है ?

Captcha एक्चुअली बीसवीं शताब्दी में एलन टयूरिंग नाम के व्यक्ति द्वारा एक गेम के दौरान accidentally डिस्कवर किया गया था. गेम कुछ इस तरह था की कंप्यूटर्स को पहचानना था कि सामने वाली डिवाइस ह्यूमन है या फिर मशीन. और मशीन का यह काम था कि कंप्यूटर को बेवकूफ बनाकर अपने आपको ह्यूमन जैसा शो करना. इसमें कंप्यूटर अलग-अलग तरह के क्वेश्चन पूछता था और पार्टिसिपेंट ह्यूमन और मशीन थे. कंप्यूटर जो क्वेश्चन पूछता था उसके जो जवाब मिलते थे उसके बेसिस पर कंप्यूटर को डिसाइड करना था कि यह जवाब जो दिए गए हैं वह एक human के हैं. अगर वह मशीन human की तरह आंसर देती थी और कंप्यूटर डिटेक्ट नहीं कर पाता था तो कंप्यूटर हार जाता था.

photo captcha

यही गेम फॉर्म विकसित होकर कैप्चा बन गया. कैप्चा का सिंपल रूल है कि आपको इस तरह के क्वेश्चन पूछना है जो कि human के लिए काफी सिंपल हो और मशीन उन क्वेश्चंस को पास ना कर पाए. इसीलिए कई बार बहुत सारे letters को तोड़ मरोड़ के, टेढ़े मेढ़े ढंग में पेश किया जाता है जो कि हर बार एक अलग ढंग से दिखाई देता है जिसे कंप्यूटर ट्रैक नहीं कर पाते और human आसानी से देखकर उन्हें समझ पाते हैं.

जैसे-जैसे captcha को ब्रेक करने वाली bot एडवांस होती गई उसी तरह कैप्चर के स्टाइल और टेक्स्ट का डिस्टॉर्शन भी थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड होता गया ताकि कोई मशीन उसे ब्रेक ना कर पाए.

उसके बाद अलग-अलग तरह के कैप्चा भी डिजाइन हुए जैसे कि यह नीचे दिया गया कैप्चा जिसे ह्यूमन बहुत आसानी से समझ सकता है लेकिन मशीन के लिए डिटेक्ट करना यह थोड़ा मुश्किल है.

आज के समय में आप एक गूगल में काफी सिंपल कैप्चा देखते हैं जिसमें की एक सिंपल स्क्वायर बॉक्स होता है और उस पर लिखा होता है. आई एम नॉट ए रोबोट. आपको सिम्पली उस पर क्लिक करना होता है और गूगल डिटेक्ट कर लेता है कि यह किसी मशीन द्वारा किया गया है या फिर माउस द्वारा किसी real यूज़र ने क्लिक किया है.


एडवांटेज और डिसएडवांटेज ऑफ कैप्चा

एडवांटेज तो काफी हमने डिस्कस किए कि किसी वेबसाइट या ऐप को अनऑथराइज्ड एक्सेस, डिनायल ऑफ सर्विस और spamming अटैक से बचाने के लिए कैप्चा का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन अगर नुकसान की बात करें तो यह unnecessary delay भी उत्पन्न करता है. example के तौर पर जैसे कि कई बार आईआरसीटीसी पर कुछ कॉम्प्लिकेटेड captcha भी रहते हैं जिन्हें आप बार-बार डालते हैं और वह कई बार गलत हो ही जाता है. तत्काल टिकट करने में एक-एक सेकंड बहुत कीमती होता है और गलत कैप्चा इस चीज को और भी ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड बना देता है.

तो उम्मीद करते हैं आपको समझ में आया होगा, कि कैप्चा क्यों और कहां और कैसे काम करता है. अभी भी अगर इससे रिलेटेड आपका कोई डाउट है तो आप कमेंट सेक्शन में हमें बता सकते हैं हम उसका रिप्लाई करने की पूरी कोशिश करेंगे तो मिलेंगे आपसे अगले आर्टिकल में तब तक के लिए गुड बाय. सायोनारा.

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