Bounce Rate क्या है ? कैसे improve करें ? Hindi me


अगर आप लोग ब्लॉगिंग करते हैं या फिर कोई वेबसाइट मेन्टेन करते हैं, तो आपने यह टर्म  तो सुनी ही होगी. बाउंस रेट. तो क्या है यह bounce रेट? क्या इससे आपके ब्लॉग या वेबसाइट की रैंकिंग पर फर्क पड़ता है? क्या इसका मीनिंग है? कैसे चेक कर सकते हैं? और कैसे आप इसे मेंटेन कर सकते हैं? हम जानेंगे इस पोस्ट में .

what is bounce rate
what is bounce rate

क्या है bounce rate?

the percentage of visitors to a particular website who navigate away from the site after viewing only one page.

अगर डेफिनिशन की बात करे तो ऊपर लिखी हैं. कहने का मतलब यह है कि आपकी वेबसाइट पर एक सिंगल session में आने वाले जितने पर्सेंट लोग आपकी वेबसाइट छोड़ कर चले जाते हैं वह परसेंट कहलाया जाता है बाउंस रेट. यानी की इसका सीधा-सीधा यह मतलब है कि अगर आपकी वेबसाइट का बाउंस रेट 50% है, तो आधे users आपका वेब पेज देखने के बाद आपके ही किसी वेबपेज कर जाएंगे और आधे लोग किसी और वेब पेज पर भाग जायेंगे. 

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कम होना चाहिए या ज्यादा ?

ज्यादा बाउंस रेट होना आपके लिए आपकी वेबसाइट के लिए अच्छा नहीं है इसका मतलब यह है कि आपकी ऑडियंस आपकी वेबसाइट पर नहीं टिक रही है और आपके वेबपेज खोलने के बाद वह किसी दूसरी वेबसाइट पर चले जाते हैं. क्योंकि आपके वेबपेज पर interesting या फिर काम की जानकारी नहीं मिल रही है. यानी कि अगर आपका बाउंसर 80% है तो इसका मतलब यह है कि 80% लोग आपके वेब पेज को देखकर वहां से दूसरी वेबसाइट पर कट लेते हैं. 

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क्या मुझे ज्यादा बाउंस रेट को सही करना चाहिए ?

जी बिल्कुल. अगर आप blog या वेबसाइट का bounce rate ज्यादा है तो उसका सीधा सीधा मतलब यह है कि या तो आपका ब्लॉग सही तरीके से नहीं लिखा गया है. या फिर उस पर अच्छी जानकारी नहीं है जिससे कि विजिटर्स आपके ब्लॉग से कहीं और शिफ्ट हो रहे हैं. अगर आपका bounce रेट कम है तो इसका मतलब यह है कि आपका ब्लॉग या वेबसाइट आपके व्यूवर्स को रिटेन करने में सक्षम है.

गूगल रैंकिंग में क्या फर्क पड़ता है?

अगर आपका बाउंस रेट ज्यादा है तो गूगल भी आप की रैंकिंग पर भी फर्क डालता है यानी कि जिनका बाउंस रेट ज्यादा होता है वह वेबसाइट रैंकिंग में नीचे चली जाती है. और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) में ये फैक्टर भी एक इम्पोर्टेन्ट रोल अदा करता है. SEO के एक्सपर्ट्स भी इस फैक्टर को improve करने पर जोर देते हैं. 

कैसे देखें अपना bounce रेट?

आप गूगल एनालिटिक्स की मदद से अपने blog का बाउंस रेट जान सकते हैं. इसके लिए आपको गूगल एनालिटिक्स पर जाकर लॉगइन करना होगा.

2018-10-23_22h44_03उसके बाद ऑडियंस > ओवरव्यू में जाकर बाउंस रेट पर क्लिक कर सकते हैं. वहां से आप अपना बाउंस rate देख सकते हैं.

2018-10-23_22h44_47किन किन दिनों पर कैसे-कैसे आपका bounce रेट कैसे vary हुआ है. यहां पर साइट कंटेंट में जाकर आप डिफरेंट डिफरेंट पेज पर क्लिक करके डिफरेंट डिफरेंट पेज का bounce रेट भी जान सकते हैं.

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Bounce Rate ज्यादा होने के कारण

  1. बाबा जी का ठुल्लू : जो भी यूजर या viewer आपके ब्लॉग पर आया है वहां उसे वह जानकारी या एंटरटेनमेंट चाहिए जो वह सोच कर आपकी वेबसाइट पर आया है अगर उसे उस तरह का कंटेंट नहीं मिलेगा तो वह यूजर आपकी वेबसाइट को बाय बाय बोल कर किसी दूसरी वेबसाइट पर चला जाएगा.
  2. वेबसाइट की कमरिया : जी बिलकुल,  वेबसाइट की बॉडी, यानी की  स्ट्रक्चर. अगर आपने अपने कंटेंट को बहुत अच्छे ढंग से नहीं set किया है और user को मुश्किल हो रही है. आपका पेज लोड होने में दिक्कत हो रही है या फिर आपके पेज में जानकारी कम और इधर उधर की बकवास ज्यादा है. या फिर आपने जानकारी को रोचक ढंग में नहीं लिखा है. तो विजिटर सीधे से आपकी वेबसाइट को छोड़कर चला जाएगा और आपका बाउंस रेट बढ़ जाएगा.
  3. Fake या फिर आधी अधूरी जानकारी : आपकी जबरदस्त टाइटल, टैग लाइन को देख कर अगर कोई user आपकी वेबसाइट पर आ गया है और वहां पर उससे वह जानकारी मिलती ही नहीं या फिर घिसी पिटी, पुराणी, आधी अधूरी जानकारी मिलती है यूजर irritate होकर आपके कंटेंट से चला जाएगा.

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Bounce रेट को कैसे इंप्रूव करें

  1. अपने content को readable बनाये. अपने कंटेंट की ज्यादा से ज्यादा readablity (यानी की पढने योग्यता) को बढ़ाएं आपका. कंटेंट जितना easily रीडेबल होगा, आपके viewers इतने ही आराम से और इजी तरीके से आपका कंटेंट पढ़ पाएंगे. इसके लिए आपको अपनी राइटिंग स्किल्स इंप्रूव करनी होंगी. जैसे कि
    • कंटेंट जैसे ही लम्बा हो रहा हो आप उसे पैराग्राफ में कन्वर्ट कर दें.
    • डिफरेंट डिफरेंट टाइप के हेडिंग्स यूज करें.
    • बुलेट प्वाइंट्स का इस्तेमाल करें
    • अगर कोई इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन है उसे हाईलाइट, बोल्ड या फिर इटैलिक में भी शेयर कर सकते हैं.
    • रिलेटेड इमेज भी बीच में डालने से आपका content interesting होता है.

      black tablet computer behind books
      Bounce Rate: Make your content readable
  2. अपने Users को गुमराह न करें. यानी की fake आर्टिकल या फिर ऐसी इनफार्मेशन title में क्लेम करना जो की आर्टिकल में हो ही न, ऐसा कभी न करें. कई बार ब्लॉगर के पास exact  इंफॉर्मेशन नहीं होती है और बे लोग सिर्फ हैडिंग बहुत ही attractive  डाल देते हैं और फिर उसके बाद जब व्यूवर्स को काम की  इंफॉर्मेशन नहीं मिलती  तो वे irritate होकर दूसरी वेबसाइट स्विच कर देते  है.
    तो सबसे पहले अपने विवर्स में एक अपने ब्रांड के लिए एक विश्वास पैदा करें, कि हां, इस ब्लॉगर का कंटेंट है तो मुझे काम की इंफॉर्मेशन मिलेगी ही मिलेगी. इससे विवर्स में ट्रस्ट पैदा होगा और वह आपके बाकी कंटेंट भी देखेंगे और bounce रेट खुद-ब-खुद कम हो जाएगा.

    Bounce rate improvement: Avoid fake news
    Bounce rate improvement: Avoid fake news
  3. गूगल एनालिटिक्स को रेगुलर चेक गूगल एनालिटिक्स आपको एक आईडिया देती है कि आपके कौन कौन से पेज अच्छे bounce rate पर काम कर रहे हैं और कौन-कौन से पेज पूर bounce rate दे रहे हैं. आप बढ़िया bounce rate वाले पेजेस को चेक कर सकते हैं की किन पेजेस पर किस तरह से कंटेंट लिखा हुआ है उससे आपको आइडिया लगेगा कि आपको आपकी राइटिंग किस तरह से रखनी है.
  4. इंटरनल लिंकिंग अगर आप एक इंटरेस्टिंग आर्टिकल लिख रहे हैं और बीच-बीच में इस तरह की keyword इस्तेमाल होती है जिसके बारे में users को जानने की इच्छा रहती है. तो आप उन्हें वहां पर Also Read या फिर related content  करके शेयर करें. इससे काफी चांस बन जाते हैं viewers आपके अपने ही पेजेस के लिंक पर क्लिक करें और आपकी वेबसाइट पर ज्यादा से ज्यादा नेविगेट करें. इससे आपका bounce rate कम हो जाएगा.

तो कुल मिलाकर बात यह है कि आपका बाउंस रेट आपकी वेबसाइट को रैंक कराने में एक इंपॉर्टेंट पैरामीटर है. आप इसे बिल्कुल इग्नोर ना करें और अपने bounce rate को कम करने के लिए ऊपर दिए गए  टिप्स का इस्तेमाल करें. अगर आपको इससे संबंधित कोई प्रश्न है या फिर आपके पास भी कोई ऐसी ट्रिक है जिससे कि बाउंस रेट better हो सकता है तो आप हमें बताएं नीचे कमेंट सेक्शन में.

Nitin Arya

He is lucky be to a fast-growing YouTuber. Like every third person now in india, he is an engineer, working as manager in public sector. A photographer and a science teacher who usually deviates to the miracles of science rather than completing syllabus.

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