Boolian Algebra (बूलियन अलजेब्रा) क्या है ? All Basics !

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logical operations
logical operations

दोस्तों स्वागत है आप सभी का मेरे इस tutorial में जहा आज में boolean algebra के बारे में पढेंगे. ये नाम आप सभी ने डिजिटल circuit में बहुत सुना होगा. इसके बिना तो आज डिजिटल communication possible ही नहीं है.

Boolean algebra का development:

बहुत पहले Aristotle ने formal logic के लिए complete system बनाया था और अपने 6 famous works इस subject पर लिखे थे . बहुत centuries के बाद भी mathematicians अपने conventional algebra का उपयोग कर इस logic problem को solve करते रहे पर उनसे ना हो पाया. इनमें से सिर्फ George Boole ही सिर्फ symbols को manipulate कर successful हो पाए. उन्होंने इसे manipulate करने के लिए अपने mathematical system of logic का इस्तेमाल किया था. Boole का एक revolutionary paper 1854 में publish हुआ था जिसका title “An investigation of the laws of the thought” था. और इसके कारण एक नए system का development हुआ, algebra of logic “BOOLEAN ALGEBRA” .

Boolian Algebra
Boolian Algebra

Boole का काम paper तक ही सीमित रहा लेकिन 1938 में Claude E. Shannon ने paper लिखा “A symbolic analysis of relay switching circuits”. और इस paper में उन्होंने boolean algebra का इस्तेमाल कर logic problems को solve करने का तरीका बताया था. जैसा की logic problems binary decisions होते हैं और boolean algebra binary values के साथ effectively deal करता है.

Binary valued quantities:

हम हर रोज़ अपनी ज़िन्दगी में logic decisions लेते हैं: “हम इस किताब को लेके जाए या नहीं?”, “मैं आज movie देखने जा सकती हूँ या नहीं?”. और प्रत्येक question का answer YES या NO में ही होता है. इसलिए उपर के सभी decision binary decision हैं. Binary decision making formal logic पर भी apply होता है. Example के लिए  ये statements consider करे:

  1. इंदिरा गाँधी भारत देश की अकेली women prime minister थी.
  2. 13-2=11
  3. Delhi इस देश का सबसे बड़ा state है.
  4. आप क्या कर रहे हैं?
  5. मैंने कल क्या खाया था?

पहला और दूसरा statement TRUE है और तीसरा FALSE है. और 4 और 5 ऐसे question का जावाब TRUE और FALSE में नहीं हो सकता है.

Truth values, TRUE या FALSE या 1 और 0 में होता है. 1 का मतलब TRUE और 0 का FALSE होता है. और ये variables जो इन सभी Truth values को store करता है उसे logical variables या binary valued variables कहते हैं. और ये variables TRUE या FALSE store करते हैं.

Logical operations:

कुछ ऐसे specific operations होते हैं जो truth function पर apply हो सकते हैं. लेकिन in operations को पढने के पहले हमे compound logical functions के बारे में जानना होगा.

logical operations
logical operations

Logical function or compound statement:

Algebraic variables जैसे a, b, c या x, y, z इत्यादि ये सभी mathematical operators के साथ combine करने के बाद algebraic expression बनते हैं. ठीक उसी तरह logic statement या truth function logical operators के साथ combine होता है, तो logical function बनते हैं.

X NOT Y OR Z

Y AND X OR Z


Logical operators:

1.  NOT operator:

ये variable single variable पर operate होता है, ये complementation operation होता है. इसका symbol bar होता है(-) होता है. NOT operator का truth table देखते हैं.

X X
0 1
1 0

इस operator को हम दुसरे symbol से भी represent करते हैं जैसे (~) ये unary operator है.

2. OR operator:

Boolean algebra का एक और important operator है OR operator जो logical addition को denote करता है और इसका symbol (+) होता है. X+Y को हम X OR Y पढ़ते हैं.

Truth table:

X Y X+Y
0 0 0
0 1 1
1 0 1
1 1 1

3. AND operator:

AND operator boolean algebra का एक और important operation करता है जिसे हम logical multiplication कहते हैं. इसका symbol (.) dot होता है.

Truth table:

X Y X.Y
0 0 0
0 1 0
1 0 0
1 1 1

इस आर्टिकल के बाद हम देखेंगे की लॉजिक गेट्स (logic gates) क्या होते हैं और कैसे काम करते हैं.


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