Working, Types and Applications of Biosensors

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हाय दोस्तों, इससे पहले आर्टिकल में हमें बायो सेन्सर्स के बेसिक को पढ़ा और यहाँ हम उनकी वर्किंग, टाइप्स और applications को जानने की कोशिश करेंगे.

Biosensors का working principle:

हमे जो biological material को test करनी होती है वो enzyme के form में होती है. तो सबसे पहले हमे उसे दूसरे form में convert करना होता है. इसके लिए हम Electroenzymatic process का उपयोग करते हैं. यह एक chemical process है जो transducer की मदद से enzymes को electrical signals (current या voltage signals) में convert करता है. Chemical process में biological response की मदद से measurement करना आसान होता है. Biological response में से एक common process है enzyme का oxidation process. Oxidation catalyst की तरह काम करता है जिसके कारण reaction fast हो जाती है और biological material के pH को भी alter करता है. pH में change होने के कारण enzyme के current carrying capacity में भी बदलाव होता है. pH और current का direct relation enzyme को measure करता है.

BioSensor working Principle

Biosensors की working:

Biological sensitive element और transducer के combination से biological material को उसके corresponding electrical signal में convert किया जाता है. Transducer का output, current या voltage signal होगा, ये उसके enzyme पर depend करता है. अगर output voltage है तो आगे की process शुरू कर सकते हैं और अगर current है तो उसे पहले op-amp की मदद से voltage में change करना होता है.

Transducer का output voltage signal amplitude में बहुत ही low होता है और high frequency noise signal पर superimpose होता है. इसलिए signal को amplify कर low pass RC filter से पास करते हैं.

अब इस signal को amplify और filter करने का काम signal processing unit या signal conditioning unit का होता है. Signal processing unit का output analog signal होता है और वो उस biological quantity जिसे measure किया गया है, उसके equivalent होता है.

इस analog signal को हम LCD display पर directly display कर सकते हैं पर अक्सर इस analog signal को microcontroller में पास किया जाता है और फिर इसे digital signal में convert कर दिया जाता है. और ये इसलिए किया जाता है क्युकि digital signal को analyze, process या store किया जा सकता है.

Biosensors के different types:

Biosensors को दो group में classify की जाती है:

  • Biological element के basis पर, जो  analysis या transduction method में use होता है. Biological elements जैसे DNA, enzymes, antibodies, microorganisms, tissues, cell receptors इत्यादि.
  • Transduction के types के अनुसार जो sensor में इस्तेमाल होता है. जैसे-element को sense करने में किस प्रकार का physiochemical होता है.

Transduction के basis पर sensor को फिर अलग अलग types में divide किया जाता है. और वो नीचे लिखे गए हैं:

  • Mass based biosensor
  • Optical based biosensor
  • Electrochemical biosensor

नीचे दिया हुआ diagram आपको biosensor की classification को समझने में मदद करेगा.

Different Types of Biosensors Types of Biosensors
Classification of Biosensor: courtesy: electronicshub.com

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जैसे की diagram से पता चलता है की mass based biosensor को Piezoelectric biosensor और Magnetoelectric biosensor में classify होता है.

Piezoelectric biosensor:

Piezoelectric biosensor को acoustic biosensor भी कहा जाता है क्युकि ये sound vibrations के principle पर based है जिसे acoustic कहा जाता है. जब piezoelectric biosensor पर mechanical force apply किया जाता है तो electric signal produce होता है.

Biological elements piezoelectric biosensor के surface पर attach किया जाता है. Piezoelectric biosensor जो mass को frequency में convert करता है, वो molecules में mechanical vibrations को sense कर उसे electrical signals में convert करता है.

Electrochemical biosensor:

Electrochemical biosensor में biological molecules को surface पर coat किया जाता है और जो sensing molecules हैं उसे उसकी जगह पर non-interfering membrane की मदद से रखा जाता है. और फिर sensing molecules compound के साथ react कर biomolecules को detect करता है और जो quantity measure किया गया है उसके proportion में electrical signal produce करता है.

Electrochemical biosensors में अलग अलग transducer का इस्तेमाल होता है जैसे – Potentiometric, Amperometric, Impedimetric इत्यादि जो chemical information को measure कर electrical signal में convert करता है. 

Optical Biosensors:

Optical biosensor में optical fibres का बहुत important role होता है. ये optical fibres sensing elements को उनके अलग अलग properties जैसे absorption, scattering, fluorescence इत्यादि के detection में मदद करता है.

Optical fibers कैसे काम करता है हम उसे एक example से समझते हैं. अगर biological elements antibodies होते हैं और उसे metal layer के साथ bound किया जाता है तो जो medium उस layer के contact में होगा उसका refractive index change होता है.

Optical biosensor का सबसे बड़ा advantage है की वो non-electrical nature का होता है. जिसकी वजह से multiple elements को एक single layer पर light की wavelength को vary कर analyze किया जाता है.

Biosensors के applications:

Biosensors आज medicine, clinical analysis और general health monitoring में बहुत important part हो गया है. Biosensor के advantages नीचे लिखे हुए हैं:

  • Small Size
  • Less cost
  • Quick Result
  • Easy to use

Biosensors का और भी जगह पर इस्तेमाल होता है. जैसे-

  • Medicine, Clinical और Diagnostic Applications
  • Environmental Monitoring
  • Industrial Applications
  • Food Industry
  • Agriculture Industry

धन्यवाद दोस्तों इस article को पढने के लिए. आगे भी लायेंगे कुछ और मजेदार और जानकारी से भरपूर आर्टिकल. जुड़े रहिये हमसे. बाय बाय.

This article is inspired from https://www.electronicshub.org/ . If you wish to above content in English then you can please follow this link.

https://www.electronicshub.org/types-of-biosensors/

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